
मुंबई: महाराष्ट्र वक्फ ट्रिब्यूनल ने मुंबई के ऐतिहासिक खिलाफत हाउस में चल रहे निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने से दूसरी बार इनकार कर दियाबला है। AIMIM के पूर्व एक्सीडेंटल विधायक भिड़ू वारिस पठान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही इस मामले में फैसला लिया जाएगा। अदालत ने अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए निर्धारित की है। अदालत के जरिए भिड़ू वारिस की मांग पूरी न होने पर ऐसा लग रहा है को भिड़ू के हाथ से खिलाफत हाउस की खोल सरकते दिखाई दे रही है।
मामले में विवाद खिलाफत हाउस की जमीन के वक्फ संपत्ति होने या नहीं होने को लेकर है। वक्फ बोर्ड की ओर से जारी नोटिस में इस संपत्ति को वक्फ संपत्ति में शामिल बताते हुए निर्माण कार्य के लिए बोर्ड की अनुमति आवश्यक होने की बात कही गई थी। वहीं, खिलाफत हाउस प्रशासन ने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संबंधित जमीन सरकारी है और खिलाफत हाउस को पट्टे पर दी गई है। इसलिए इस संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का नियंत्रण होने का दावा सही नहीं है।
सुनवाई के दौरान खिलाफत हाउस की ओर से अधिवक्ता गुलाम दस्तगीर शेख ने दलील दी कि परिसर में किसी होटल की स्थापना या व्यावसायिक गतिविधि की योजना नहीं है। यहां शैक्षणिक उद्देश्य से निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे आम जनता और मुस्लिम समुदाय के बड़े वर्ग को लाभ होगा। उन्होंने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग का विरोध करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की है।
दूसरी ओर, वारिस पठान की ओर से पेश अधिवक्ता निसार खान ने दलील दी कि संबंधित जमीन वक्फ संपत्ति है और वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना यहां निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है, इसलिए निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।मामले में एक अन्य पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए संबंधित सूची अदालत के समक्ष प्रस्तुत की और निर्माण कार्य रोकने की मांग की।हालांकि महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि यह मिल्कियत वक्फ की है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने फिलहाल निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। मामले में संपत्ति की कानूनी स्थिति और संबंधित पक्षों के दावों पर आगे सुनवाई होगी। अब सभी की नजरें 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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