Mumbai Cyber Fraud Gang Busted – मुंबई पुलिस की अपराध शाखा और साइबर सेल ने देशभर में ऑनलाइन ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने राजस्थान में सक्रिय इस गिरोह के छह शातिर सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह बड़े पैमाने पर फर्जी (शेल) कंपनियां स्थापित कर और जाली दस्तावेजों पर चालू (करंट) बैंक खाते खोलकर साइबर ठगी, ऑनलाइन टास्क फ्रॉड और अवैध गेमिंग से ठगी गई करोड़ों रुपये की रकम को विभिन्न स्तरों पर रूट और मनी लॉन्ड्रिंग करने का काम कर रहा था।
Mumbai Cyber Fraud Gang Busted – जाली दस्तावेजों से शेल कंपनियां और म्यूल बैंक खाते बनाने का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार लोगों को पैसों का लालच देकर उनके आधार, पैन कार्ड व अन्य केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग करते थे। इनके आधार पर फर्जी व्यापारिक और व्यावसायिक फर्में (Shell Entities) कागजों पर खड़ी की जाती थीं और विभिन्न बैंकों में करंट अकाउंट खोले जाते थे। साइबर फ्रॉड के शिकार पीड़ितों से लूटी गई रकम सीधे इन म्यूल बैंक खातों में मंगवाई जाती थी, ताकि मुख्य अपराधियों तक पुलिस की पहुंच न हो सके।
Mumbai Cyber Fraud Gang Busted – मल्टी-लेयर ट्रांजैक्शन से ठगी का पैसा बाहर भेजने की साजिश
आरोपियों का नेटवर्क एक बहुस्तरीय संरचना (Multi-Layered Structure) में काम करता था। जैसे ही किसी पीड़ित से ठगी की राशि किसी बैंक खाते में जमा होती थी, आरोपी तुरंत नेट बैंकिंग, यूपीआई और चेक के जरिए उसे कई शेल कंपनियों के खातों में विभाजित कर ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद रकम को नकद निकासी या डिजिटल करेंसी के जरिए गिरोह के सरगनाओं तक पहुंचाया जाता था। मुंबई पुलिस की तकनीकी जांच में कई संदिग्ध खातों से करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन के रिकॉर्ड मिले हैं।
Mumbai Cyber Fraud Gang Busted – छापेमारी में बड़ी संख्या में चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल जब्त
मुंबई पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी इनपुट और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर राजस्थान में दबिश देकर गिरोह के छह प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के ठिकानों से बड़ी संख्या में बैंकों की चेकबुक, पासबुक, एटीएम/डेबिट कार्ड, जाली रबर स्टैंप, कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय संपर्कों तथा देशभर के साइबर पोर्टल (1930) पर दर्ज शिकायतों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
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