ISRO LVM-3 Bahubali Rocket – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सबसे भारी और भरोसेमंद रॉकेट ‘एलवीएम-3’ (LVM-3), जिसे ‘बाहुबली’ के नाम से जाना जाता है, के निर्माण और संचालन को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया तेज हो गई है। भारत के अंतरिक्ष नियामक इन-स्पेस (IN-SPACe) ने देश के शीर्ष औद्योगिक घरानों से रुचि पत्र (Expression of Interest) आमंत्रित किए हैं। इस ऐतिहासिक कदम के तहत लार्सन एंड टुब्रो (L&T), अडानी ग्रुप, जेएसडब्ल्यू (JSW) और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियां इस भारी प्रक्षेपण यान के निर्माण, संचालन और व्यावसायिक उपयोग की दौड़ में शामिल हो गई हैं।
ISRO LVM- 3 Bahubali Rocket – टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इन-स्पेस की योजना
इन-स्पेस के अनुसार, चयनित निजी कंसोर्टियम को इसरो से 42 महीनों की अवधि के लिए तकनीक, विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे का पूरा समर्थन दिया जाएगा या जब तक कि दो एलवीएम-3 रॉकेट सफलतापूर्वक निर्मित और लॉन्च नहीं हो जाते। इसके बाद निजी कंपनियां रॉकेट का पूर्ण उत्पादन स्वयं करेंगी। एलएंडटी और महिंद्रा के अलावा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और गोदरेज एयरोस्पेस भी इस रेस में मजबूत दावेदार हैं, जो पहले से ही इसरो के रॉकेट और सैटेलाइट कंपोनेंट्स के निर्माण में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
ISRO LVM- 3 Bahubali Rocket – 60 रॉकेट और ₹25,000 करोड़ का बड़ा कारोबारी बाजार
इन-स्पेस के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका के अनुसार, सरकार ने अगले 12 से 14 वर्षों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ 60 से अधिक एलवीएम-3 रॉकेटों के निर्माण की रूपरेखा को मंजूरी दी है। यह लगभग 25,000 करोड़ रुपये का विशाल व्यावसायिक अवसर पेश करता है। भारत अपनी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2022 के 8.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने और वैश्विक बाजार में 8% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके अतिरिक्त, रक्षा निगरानी के लिए तैयार किए जाने वाले 52 सैटेलाइट्स के समूह को लॉन्च करने के लिए भी एलवीएम-3 रॉकेटों की निरंतर मांग बनी रहेगी।
ISRO LVM- 3 Bahubali Rocket – इसरो के मुख्य शोध और भविष्य के मिशनों को मिलेगी गति
चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाला एलवीएम-3 रॉकेट 4 टन तक के पेलोड को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) और 10 टन से अधिक को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने की क्षमता रखता है। नियमित लॉन्चिंग और व्यावसायिक संचालन निजी कंपनियों को सौंपे जाने के बाद इसरो अपने संसाधनों को उन्नत अनुसंधान, मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान), चंद्र अन्वेषण और अंतरग्रहीय मिशनों पर केंद्रित कर सकेगा। यह कदम भारत को वैश्विक भारी प्रक्षेपण बाजार में एक बेहद प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।
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