Mumbai Chemical Supplier Fraud – मुंबई के एक केमिकल सप्लायर से फर्जी कंपनी, जाली पहचान पत्र और नकली यूपीआई पेमेंट रसीदों के जरिए 17.65 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मुंबई पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर राजस्थान से दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपियों ने एक काल्पनिक ट्रेडिंग फर्म और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारी मात्रा में केमिकल का ऑर्डर दिया था और नकली ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट दिखाकर पूरा माल हड़प लिया था।
Mumbai Chemical Supplier Fraud – फर्जी कंपनी और जाली पहचान पत्र बनाकर दिया केमिकल का बड़ा ऑर्डर
पीड़ित केमिकल कारोबारी की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खुद को एक बड़ी औद्योगिक फर्म का अधिकृत खरीदार बताकर सप्लायर से संपर्क किया था। आरोपियों ने विश्वास जीतने के लिए जाली जीएसटी नंबर, फर्जी पैन कार्ड और कूटरचित व्यावसायिक दस्तावेज साझा किए। इसके बाद उन्होंने 17.65 लाख रुपये मूल्य के केमिकल उत्पादों का ऑर्डर दिया और माल को बताए गए ट्रांसपोर्ट गोदाम पर डिलीवर करने को कहा। व्यापारी ने दस्तावेजों को सही मानकर केमिकल की खेप तय पते पर रवाना कर दी।
Mumbai Chemical Supplier Fraud – फेक यूपीआई पेमेंट रसीदें दिखाकर दिया चकमा, खाते में नहीं पहुंचे पैसे
केमिकल की डिलीवरी प्राप्त होते ही आरोपियों ने व्यापारी को मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के फर्जी स्क्रीनशॉट और नकली पेमेंट रसीदें भेज दीं। आरोपियों ने व्यापारी को झांसा दिया कि सर्वर में तकनीकी खराबी के कारण खाते में राशि पहुंचने में थोड़ा समय लग रहा है। हालांकि, कुछ घंटे बीतने के बाद भी जब खाते में पैसे जमा नहीं हुए और आरोपियों ने अपने सभी मोबाइल नंबर बंद कर लिए, तब व्यापारी को ठगी का अहसास हुआ और उसने तुरंत पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
Mumbai Chemical Supplier Fraud – राजस्थान से दबोचे गए दोनों आरोपी, अन्य व्यापारियों से ठगी की भी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष जांच टीम और साइबर सेल ने कॉल डेटा रिकॉर्ड व डिजिटल ट्रेल की मदद से जांच शुरू की। पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर राजस्थान में छापेमारी की और दोनों मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने इसी तरीके से राज्य और देश के अन्य कितने रासायनिक व औद्योगिक व्यापारियों को अपना शिकार बनाया है।
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