Kapil Sibal: महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भाजपा पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि पहले अयोध्या, फिर मथुरा और अब नागपुर में चुनावी हार से ऐसा लगता है कि भगवान भी भाजपा से नाराज हैं। नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी है। यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र है। इस चुनावी नतीजे पर प्रतिक्रिया देते हुए सिब्बल ने भाजपा को विपक्ष की चिंता करने के बजाय अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करने की सलाह दी।
नागपुर में कांग्रेस की जीत पर कपिल सिब्बल का तंज, ‘भगवान भी भाजपा से नाराज’
Kapil Sibal: महाराष्ट्र विधान परिषद की नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस की जीत के बाद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति और हालिया प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिब्बल ने कहा कि भाजपा कांग्रेस की स्थिति को लेकर ज्यादा चिंतित दिखाई देती है, जबकि उसे अपने चुनावी प्रदर्शन पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और गोरखपुर जैसे धार्मिक तथा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया।
सिब्बल ने कहा कि भाजपा को यह समझना चाहिए कि वह अयोध्या में हार चुकी है, मथुरा और वाराणसी में भी उसे चुनावी झटके लगे हैं और अब नागपुर में भी पराजय का सामना करना पड़ा है। उन्होंने गोरखपुर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिणामों से ऐसा लगता है कि भगवान भी भाजपा से नाराज हैं।
हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों में सिब्बल द्वारा किए गए चुनावी तुलना संबंधी दावे अलग-अलग चुनावों और निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े हैं। इसलिए इन्हें सभी स्थानों पर भाजपा की एक जैसी चुनावी हार का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सिब्बल ने धार्मिक स्थलों से जुड़े कुछ सरकारी और प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पवित्र स्थलों पर गलत काम किए जाते हैं या मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो जनता उसका जवाब जरूर मांगती है।
उनके इन बयानों को भाजपा की नीतियों और चुनावी प्रदर्शन पर राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
नागपुर में 40 घंटे से ज्यादा चली मतगणना, अभिजीत वंजारी ने 3,271 वोटों से हराया
नागपुर स्नातक विधान परिषद सीट के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी और भाजपा के सुधाकर कोहले के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला।
मतगणना मंगलवार, 27 अक्टूबर को शुरू हुई थी और 40 घंटे से अधिक समय तक चलने के बाद गुरुवार, 29 अक्टूबर की सुबह अंतिम परिणाम घोषित किया गया।
चुनाव परिणाम के अनुसार, कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 63,960 वोट हासिल हुए। इस तरह वंजारी ने 3,271 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
दिलचस्प बात यह रही कि शुरुआती वरीयता मतों की गिनती के बाद सुधाकर कोहले कांग्रेस उम्मीदवार से 4,294 वोटों से आगे चल रहे थे।
हालांकि, किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित मतों का आवश्यक कोटा नहीं मिलने के कारण दूसरी वरीयता के मतों की गणना की गई। बाद की गणना में अभिजीत वंजारी आगे निकल गए और अपनी सीट बचाने में सफल रहे।
निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को मिले मतों और उनकी दूसरी वरीयता ने इस मुकाबले के अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस की यह लगातार दूसरी जीत है। वर्ष 2020 में भी अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार संदीप जोशी को हराया था।
इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख नेताओं ने प्रचार किया था।
नतीजे के बाद भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले ने बड़ी संख्या में मतों के अमान्य होने को लेकर चिंता जताई। हालांकि, उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के अनुसार अभिजीत वंजारी की जीत स्वीकार करते हुए उन्हें बधाई भी दी।
INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली पर भी बोले सिब्बल, सरकार पर लोगों को रोकने का आरोप
नागपुर चुनाव परिणाम के अलावा कपिल सिब्बल ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित INDIA गठबंधन की रैली को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस राजनीतिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल होने से रोकने की कोशिश कर रही है।
सिब्बल के अनुसार, लोगों को ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली आने से रोकने, बसों के प्रवेश में बाधा डालने और राजधानी की सीमाओं पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि जब बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदान में एकत्र होंगे, तब सरकार को जनता की नाराजगी का अंदाजा होगा।
हालांकि, रैली में लोगों को शामिल होने से रोकने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह रैली विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रस्तावित की गई है।
दूसरी ओर, दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने दिवाली के कारोबारी सीजन को देखते हुए रैली की तारीख बदलने की मांग की है। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि बड़ी भीड़ और वाहनों की आवाजाही से मध्य दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है।
इस बीच नागपुर की चुनावी हार और कपिल सिब्बल के बयानों ने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक चर्चा बढ़ा दी है।
भाजपा के लिए नागपुर का चुनाव परिणाम महत्वपूर्ण है, जबकि विपक्ष इसे अपने चुनावी प्रदर्शन के पक्ष में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, किसी एक विधान परिषद सीट के परिणाम से व्यापक जनमत का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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