Nitesh Rane: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बंदरगाहों से होने वाली आमदनी बढ़ाने के लिए नई योजना तैयार की है। राज्य के मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने घोषणा की है कि सरकार कोंकण क्षेत्र के चार जिलों में अपनी पूर्ण मालिकी वाले बंदरगाह विकसित करने की योजना बना रही है। ये बंदरगाह पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में बनाए जाएंगे। राणे के मुताबिक, इन परियोजनाओं से सरकार को 6,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके साथ ही सरकार रत्नागिरी के जयगढ़ में जहाज निर्माण केंद्र स्थापित करने, महाराष्ट्र सागरी मंडल के लिए नई नीति लाने और सरकारी नौकाओं के जरिए यात्री जल परिवहन शुरू करने पर भी काम कर रही है।
Nitesh Rane: चार जिलों में बनेंगे सरकारी बंदरगाह, मौजूदा 48 बंदरगाहों से सिर्फ ₹258 करोड़ की सालाना आय
महाराष्ट्र के बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने मुंबई के मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य के समुद्री बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में महाराष्ट्र में 48 गैर-प्रमुख बंदरगाह और जेटियां हैं। इनमें से अधिकांश का संचालन निजी कंपनियों के माध्यम से किया जाता है। सरकार को इनसे मुख्य रूप से रॉयल्टी और संबंधित शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होता है।
राणे के अनुसार, इन बंदरगाहों से राज्य सरकार को सालाना लगभग 258 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। सरकार अब इस व्यवस्था में बदलाव कर बंदरगाहों के विकास और संचालन में अपनी सीधी भागीदारी बढ़ाना चाहती है।
नई योजना के तहत पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में एक-एक बंदरगाह विकसित करने का प्रस्ताव है। इन बंदरगाहों पर राज्य सरकार का पूर्ण स्वामित्व रखने की योजना बनाई जा रही है।
नितेश राणे ने दावा किया कि इन परियोजनाओं से राज्य को करीब 6,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता है। हालांकि, यह राशि कितने वर्षों में प्राप्त होगी, इसके लिए कुल कितना निवेश करना पड़ेगा और निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इस संबंध में उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।
सरकार को उम्मीद है कि नई परियोजनाओं से मालवाहतूक, लॉजिस्टिक्स, समुद्री उद्योग, व्यापारिक सेवाओं और बंदरगाहों से जुड़े अन्य व्यवसायों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे तटीय जिलों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
महाराष्ट्र सागरी मंडल के लिए नई नीति, सरकारी नौकाओं से यात्री जल परिवहन शुरू करने की तैयारी
Nitesh Rane: बंदरगाहों के निर्माण के साथ ही महाराष्ट्र सरकार राज्य की समुद्री परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यापक बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है।
नितेश राणे ने बताया कि महाराष्ट्र सागरी मंडल (Maharashtra Maritime Board) के लिए एक संशोधित नीति तैयार की जा रही है। यह नीति फिलहाल अंतिम चरण में है और सरकार इसे आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र से पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी।
नई नीति के तहत समुद्री क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने, बंदरगाहों की सुविधाओं का विस्तार करने और उपलब्ध समुद्री संसाधनों का बेहतर व्यावसायिक उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा महाराष्ट्र सागरी मंडल खुद की नौकाएं खरीदकर यात्री जल परिवहन सेवाएं शुरू करने की योजना पर भी काम कर रहा है।
वर्तमान में राज्य के कई जलमार्गों पर निजी ऑपरेटर यात्री सेवाएं संचालित करते हैं। इनसे सरकार को कर और शुल्क के माध्यम से आय होती है, लेकिन प्रत्यक्ष संचालन से होने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा निजी कंपनियों के पास जाता है।
इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से सरकार अपनी नौकाओं के माध्यम से यात्रियों को जल परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है।
इस पहल से सरकार के लिए राजस्व के नए स्रोत तैयार हो सकते हैं। साथ ही मुंबई महानगर क्षेत्र और कोंकण के तटीय भागों में जलमार्ग परिवहन के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, नई नौका सेवाओं के मार्ग, किराया, शुरुआत की तारीख और प्रस्तावित निवेश के बारे में विस्तृत घोषणा अभी नहीं की गई है।
रत्नागिरी के जयगढ़ में जहाज निर्माण केंद्र की योजना, समुद्री उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
महाराष्ट्र सरकार की समुद्री विकास योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा रत्नागिरी जिले के जयगढ़ में जहाज निर्माण परियोजना स्थापित करना है।
नितेश राणे के अनुसार, सरकार इस परियोजना के लिए गोवा शिपयार्ड के माध्यम से संभावनाएं तलाश रही है। गोवा शिपयार्ड देश में रक्षा और अन्य समुद्री जरूरतों के लिए विभिन्न प्रकार के जहाजों का निर्माण करता है।
सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र की तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक क्षमता का विस्तार महाराष्ट्र में करना है। जयगढ़ में जहाज निर्माण केंद्र विकसित होने से राज्य में समुद्री इंजीनियरिंग, जहाजों के रखरखाव और संबंधित उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
इस परियोजना से रत्नागिरी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश तथा रोजगार बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
इसके साथ ही सरकार मत्स्यव्यवसाय क्षेत्र में अतिरिक्त मूल्य निर्माण की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। इसके लिए आंध्र प्रदेश में अपनाए जा रहे कुछ औद्योगिक मॉडलों का अध्ययन किया जा रहा है।
मछली प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले अवशेषों से कोलेजन जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। इससे मछली उद्योग से जुड़े व्यवसायों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
महाराष्ट्र सरकार की इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य तटीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और बंदरगाह आधारित उद्योगों से राज्य की आय बढ़ाना है।
हालांकि, चार नए बंदरगाहों, जयगढ़ जहाज निर्माण केंद्र और सरकारी जल परिवहन सेवाओं की योजनाएं अभी प्रस्तावित चरण में हैं। इनके वास्तविक आर्थिक लाभ, निवेश और रोजगार पर प्रभाव का आकलन परियोजनाओं की विस्तृत योजना तथा क्रियान्वयन के बाद ही किया जा सकेगा।
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