India Russia Defence Cooperation Strategic Pivot – वैश्विक सामरिक संतुलन और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत और रूस ने अपने दीर्घकालिक द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई गति देने का फैसला किया है। रक्षा गलियारों और रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नई दिल्ली और मॉस्को के बीच सैन्य साझेदारी अब केवल हथियारों की सीधी खरीद (Off-the-shelf purchases) तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका मुख्य ध्यान दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, उन्नत हथियारों के सह-उत्पादन (Co-production) और भारत में ही महत्वपूर्ण सैन्य पुर्जों के स्थानीय विनिर्माण पर केंद्रित हो गया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप दोनों देश अब ऐसी व्यवस्था तैयार करने में जुटे हैं, जिससे भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता और सैन्य हार्डवेयर की निरंतर आपूर्ति बाधित न हो सके।
India Russia Defence Cooperation Strategic Pivot – स्पेयर पार्ट्स की स्थानीय असेंबली और मेंटेनेंस हब की स्थापना पर विशेष ध्यान
भारतीय सेना और वायुसेना के बेड़े में रूसी मूल के सैन्य उपकरणों की भारी हिस्सेदारी को देखते हुए दोनों पक्षों ने लॉजिस्टिक्स और स्पेयर पार्ट्स की निर्बाध आपूर्ति को शीर्ष प्राथमिकता दी है। योजना के तहत भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) और निजी रक्षा विनिर्माताओं के साथ मिलकर देश के भीतर ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है। इस कदम से टी-90 टैंक, बीएमपी लड़ाकू वाहन और विभिन्न नौसैनिक प्रणालियों के कलपुर्जों के लिए विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर ही सेना की तकनीकी जरूरतों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
India Russia Defence Cooperation Strategic Pivot – सुखोई-30MKI के स्वदेशी आधुनिकीकरण और नई मिसाइल प्रणालियों पर तकनीकी तालमेल
रणनीतिक चर्चाओं के केंद्र में भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों का व्यापक आधुनिकीकरण (Super Sukhoi Program) शामिल है। इसके तहत भारतीय एवियोनिक्स, उत्तम रडार और स्वदेशी हथियारों को रूसी एयरफ्रेम के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इसके साथ ही, दोनों देशों के सफल संयुक्त उपक्रम ‘ब्रह्मोस’ की अगली पीढ़ी के अधिक मारक और हल्के संस्करणों (BrahMos-NG) के तेजी से विकास और परीक्षण को लेकर तकनीकी समन्वय को और तेज किया गया है, ताकि थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों अंगों की लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता को मजबूत किया जा सके।
India Russia Defence Cooperation Strategic Pivot – बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के बीच रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने का मजबूत संदेश
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों की यह निरंतरता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की दृढ़ नीति को दर्शाती है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत जहां एक ओर पश्चिमी देशों के साथ अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों का आदान-प्रदान बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ अपनी दशकों पुरानी विश्वसनीय साझेदारी को सह-उत्पादन के आधुनिक ढांचे में ढालकर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुरक्षित रख रहा है। यह सहयोगात्मक मॉडल भविष्य में दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को नई मजबूती प्रदान करेगा।
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