India Russia Defence Manufacturing Co Production Under Watch – वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती मांग के बीच भारत और रूस के बीच रक्षा विनिर्माण सहयोग एक नए निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया रक्षा रिपोर्टों और कूटनीतिक गलियारों के अनुसार, नई दिल्ली और मॉस्को के बीच दशकों पुराने सैन्य संबंधों को पारंपरिक ‘खरीदार-विक्रेता’ (Buyer-Seller) ढांचे से आगे बढ़ाकर पूर्णतः ‘संयुक्त सह-उत्पादन’ (Co-production), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारत में स्थानीय विनिर्माण (Local Manufacturing) की ओर ले जाने पर नए सिरे से गंभीर बातचीत शुरू हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों और पश्चिमी कूटनीतिक हलकों द्वारा इस नए रुझान पर बेहद बारीकी से नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह कदम भारत की स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ यूरेशियाई क्षेत्र में रक्षा समीकरणों को नया आकार दे सकता है।
India Russia Defence Manufacturing Co Production Under Watch – ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्थानीयकरण पर जोर, केवल सैन्य खरीद के दिन लदे
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत अब सीधे तौर पर तैयार विदेशी सैन्य साजो-सामान खरीदने की रणनीति से पूरी तरह पीछे हट रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान की स्पष्ट प्राथमिकता यह है कि भविष्य के सभी बड़े रक्षा अनुबंधों में घरेलू स्तर पर पुर्जों का निर्माण, साझा असेंबली लाइन और महत्वपूर्ण बौद्धिक संपदा (IP) का हस्तांतरण शामिल होना चाहिए। रूस के साथ भी बातचीत का मुख्य एजेंडा यही है कि मॉस्को अब केवल आपूर्तिकर्ता की भूमिका में न रहकर भारतीय रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर हथियारों और प्रणालियों का सह-विकास करे।
India Russia Defence Manufacturing Co Production Under Watch – ब्रह्मोस परियोजना बनी सफल मिसाल, अगली पीढ़ी के हथियारों और मिसाइलों पर फोकस
भारत और रूस के बीच संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल इस सह-उत्पादन मॉडल की सबसे सफल मिसाल बनकर उभरी है, जिसे अब तीसरे देशों में निर्यात भी किया जा रहा है। वर्तमान चर्चाओं में ब्रह्मोस के अगली पीढ़ी (Next-Gen) के हल्के और हाइपरसोनिक संस्करणों को स्थानीय स्तर पर तैयार करने के साथ-साथ भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों, विशेष रूप से सुखोई-30MKI बेड़े के बड़े पैमाने पर स्वदेशी आधुनिकीकरण (Super Sukhoi Upgrade) के लिए रूसी तकनीकी सहयोग को स्थानीय कारखानों में स्थानांतरित करने पर विचार हो रहा है। इसके अलावा बख्तरबंद वाहनों और नौसैनिक प्रणालियों के कलपुर्जों की भारत में ही निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त विनिर्माण हब बनाने की रूपरेखा पर काम जारी है।
India Russia Defence Manufacturing Co Production Under Watch – वैश्विक प्रतिबंधों और आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत की संतुलित कूटनीति
रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके बाद रूस पर लगे कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण पिछले कुछ समय में सैन्य आपूर्ति श्रृंखला और स्पेयर पार्ट्स की डिलीवरी में पैदा हुई चुनौतियों ने भारत को स्थानीय उत्पादन पर जोर देने के लिए और अधिक प्रेरित किया है। भारत जहां एक ओर अमेरिका, फ्रांस और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने रक्षा सहयोग का विविधीकरण कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूसी सैन्य हार्डवेयर पर अपनी ऐतिहासिक निर्भरता को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय विनिर्माण को ढाल बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यह नई विनिर्माण साझेदारी पश्चिमी देशों की आपत्तियों और भारत के बहुध्रुवीय विदेश नीति के संतुलन को किस तरह साधती है।
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