HAL Koraput Division Milestone 2000 Aero Engines Su30MKI AL31FP – भारत के स्वदेशी सैन्य विमानन क्षेत्र और रक्षा विनिर्माण इतिहास में ओडिशा स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कोरापुट डिवीजन ने एक अभूतपूर्व और स्वर्णिम उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े को अत्याधुनिक प्रणोदन क्षमता (Propulsion Power) प्रदान करने वाली कोरापुट इंजन डिवीजन ने अपनी स्थापना के बाद से कुल 2,000 एयरो-इंजनों (Aero-Engines) के निर्माण का ऐतिहासिक मील का पत्थर आधिकारिक तौर पर पार कर लिया है। इस प्रतिष्ठित डिवीजन ने भारतीय वायुसेना (IAF) की रीढ़ माने जाने वाले फ्रंटलाइन फाइटर जेट सुखोई-30एमकेआई (Su-30MKI) के लिए उन्नत AL-31FP टर्बोफैन इंजनों के स्वदेशी उत्पादन, असेंबली, परीक्षण और व्यापक ओवरहाल में उत्कृष्ट महारत साबित की है। यह सफलता ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा निर्माण में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक विशाल छलांग है।
HAL Koraput Division Milestone – मिग-21 के R-11 इंजन से लेकर सुखोई के AL-31FP तक, दशकों का गौरवशाली तकनीकी सफर
कोरापुट डिवीजन की स्थापना 1964 में तत्कालीन मिग-21 लड़ाकू विमानों के R-11/R-25 इंजनों के निर्माण और रखरखाव के लिए की गई थी। इसके बाद इस डिवीजन ने मिग-27 के R-29B इंजन और मिग-29 के RD-33 इंजनों के उत्पादन और ओवरहाल में दशकों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। पिछले दो दशकों में कोरापुट यूनिट ने सुखोई-30एमकेआई के ट्विन-इंजन कॉन्फ़िगरेशन वाले थ्रस्ट-वेक्टरिंग AL-31FP इंजनों के घरेलू उत्पादन का दायित्व पूरी सफलता के साथ संभाला है। शून्य से शुरू होकर जटिल सुपरअलॉय कास्टिंग, सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड तकनीक और टरबाइन डिस्क की सटीक मशीनिंग में महारत हासिल कर कोरापुट इकाई ने देश के भीतर एक मजबूत रक्षा एयरोस्पेस विनिर्माण इकोसिस्टम खड़ा किया है।
HAL Koraput Division Milestone – 240 अतिरिक्त AL-31FP इंजनों का 26,000 करोड़ का अनुबंध, 63% तक पहुंचा स्वदेशीकरण
उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय वायुसेना के 260 सुखोई-30एमकेआई बेड़े की सतत परिचालन तत्परता बनाए रखने के लिए एचएएल को 240 अतिरिक्त AL-31FP इंजनों की आपूर्ति के लिए 26,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऐतिहासिक अनुबंध को मंजूरी दी है। इन सभी 240 इंजनों का निर्माण कोरापुट डिवीजन में ही किया जाना निर्धारित है। एचएएल अधिकारियों के मुताबिक, इन इंजनों में स्वदेशी कलपुर्जों का स्तर अब 54 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है। भविष्य के बैचों में इसे और आगे ले जाने की योजना है, जिससे विदेशी मूल निर्माता (OEM) पर भारत की रणनीतिक निर्भरता काफी कम हो गई है।
HAL Koraput Division Milestone – भविष्य के स्वदेशी इंजनों और ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड कार्यक्रम में निभाएगा केंद्रीय भूमिका
2,000 इंजनों के इस ऐतिहासिक आंकड़े को छूने के साथ ही कोरापुट डिवीजन न केवल सुखोई-30एमकेआई के आगामी ‘सुपर सुखोई’ व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है, बल्कि गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) और विदेशी तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर भविष्य के स्वदेशी 110-किलोन्यूटन लड़ाकू विमान इंजनों के उत्पादन के लिए भी एक सक्षम हब के रूप में उभर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च तुंगता और जटिल मौसम में काम करने वाले अत्याधुनिक सैन्य इंजनों का ऐसा विशाल विनिर्माण आधार भारत को वैश्विक रक्षा निर्यात और इंडस्ट्रियल सस्टेनेंस के क्षेत्र में शीर्ष पायदान पर खड़ा करता है।
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