India 114 Rafale MRFA Fighter Program – उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर चीन और पाकिस्तान की दोहरी सामरिक चुनौती और भारतीय वायुसेना (IAF) की लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या में आ रही कमी के बीच देश के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) परियोजना में निर्णायक प्रगति देखने को मिल रही है। रक्षा मंत्रालय और वायुसेना मुख्यालय के स्तर पर फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण के प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। नौसेना द्वारा 26 राफेल-मरीन (Rafale-M) सौदे को अंतिम रूप दिए जाने और वायुसेना में पहले से तैनात 36 राफेल विमानों के सफल संचालन के बाद ‘राफेल’ इस वैश्विक दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरा है। इस मेगा प्रोग्राम के तहत शुरुआती 18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे फ्रांस से आएंगे, जबकि बाकी 96 लड़ाकू विमानों का निर्माण भारतीय रणनीतिक साझेदार के साथ मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही किया जाना प्रस्तावित है।
India 114 Rafale MRFA Fighter Program – घटती स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ को थामने की तत्काल जरूरत, मिग-21 और पुराने बेड़े की विदाई से बना अंतर
भारतीय वायुसेना की स्वीकृत स्क्वाड्रन क्षमता 42 है, लेकिन मिग-21 और जगुआर जैसे पुराने लड़ाकू विमानों के चरणबद्ध रिटायरमेंट के कारण वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 30-31 स्क्वाड्रन के निचले स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि स्वदेशी तेजस एमके-1ए (Tejas Mk1A) और आगामी तेजस एमके-2 (LCA Mk2) भविष्य के आधार स्तंभ हैं, लेकिन 4.5 पीढ़ी के भारी और मध्यम वजन वाले मल्टी-रोल जेट्स की कमी को तुरंत पाटने के लिए वायुसेना को ऑफ-द-शेल्फ और सिद्ध प्लेटफॉर्म की सख्त दरकार है। राफेल के पहले दो स्क्वाड्रन (अंबाला स्थित ‘गोल्डन एरोज’ और हाशिमारा स्थित ‘फाल्कन्स’) ने पूर्वी लद्दाख और पूर्वोत्तर सीमाओं पर अपनी उत्कृष्ट युद्धक क्षमता और त्वरित तैनाती को पूरी तरह साबित किया है।
India 114 Rafale MRFA Fighter Program – भारतीय विशिष्टताएं (ISE) पहले से तैयार; मेंटेनेंस, हथियारों और ट्रेनिंग का खर्च होगा कम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी नए लड़ाकू विमान (जैसे अमेरिकी F-15EX, F-21 या स्वीडिश ग्रिपेन-ई) को चुनने की तुलना में राफेल का चयन भारत के लिए लॉजिस्टिक्स और लागत के लिहाज से सबसे किफायती और व्यावहारिक विकल्प है। भारत पहले ही 36 राफेल सौदे के तहत 13 भारत-विशिष्ट संवर्द्धन (India-Specific Enhancements – ISE), जैसे कि उच्च तुंगता वाले लेह एयरबेस से कोल्ड-इंजन स्टार्ट, उन्नत रडार चेतावनी रिसीवर और 10 घंटे का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर विकसित कराने का भारी खर्च वहन कर चुका है। इसके अलावा, अंबाला और हाशिमारा में मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटियोर (Meteor) एयर-टू-एयर मिसाइलें और स्कैल्प (SCALP) डीप-स्ट्राइक मिसाइलों का भंडार पहले से मौजूद है, जिससे अतिरिक्त 114 राफेल को शामिल करने की लागत और प्रशिक्षण का समय आधा रह जाएगा।
India 114 Rafale MRFA Fighter Program – 96 विमानों का भारत में उत्पादन, एयरोस्पेस इकोसिस्टम और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी को मिलेगी छलांग
114 विमानों के इस बहु-अरब डॉलर सौदे की सबसे प्रमुख शर्त व्यापक ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) और स्वदेशी निर्माण है। डसॉल्ट एविएशन और उसके सहयोगी साफ्रान (Safran) व थेल्स (Thales) भारतीय निजी व सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर देश में पूर्ण असेंबली लाइन, एवियोनिक्स इंटीग्रेशन और इंजन मेंटेनेंस, रिपेयर व ओवरहाल (MRO) हब स्थापित करने की पेशकश कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा जारी है। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह भारत के घरेलू एयरोस्पेस विनिर्माण और रक्षा निर्यात क्षमता को नई वैश्विक ऊंचाई पर पहुंचा देगा।
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