Sachin Sawant Slams Ganeshotsav Liquor Ban – महाराष्ट्र में आगामी गणेशोत्सव के दौरान पुणे प्रशासन द्वारा शराब की दुकानों को लंबे समय तक बंद रखने (ड्राई डे) के आदेश को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन सावंत ने राज्य सरकार और प्रशासन के इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए देश में ‘बहुसंख्यकवादी राजनीति’ (Majoritarian Politics) के बढ़ते असर पर गंभीर चिंता जताई है। सावंत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता के हालिया विचारों का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि यह मामला सिर्फ त्योहार के दौरान शराब की दुकानें बंद कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में समाज के भीतर तैयार किए जा रहे खतरनाक माहौल की ओर एक गंभीर चेतावनी है।
Sachin Sawant Slams Ganeshotsav Liquor Ban – ‘सत्ता के लिए बहुसंख्यक तुष्टिकरण खतरनाक’, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का लगाया आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा करते हुए सचिन सावंत ने कहा कि पुणे में 10 से 12 दिनों के लिए शराब बिक्री पर थोपे गए प्रतिबंध का सीधा संबंध पिछले 12 वर्षों में तेजी से बढ़े बहुसंख्यकवादी एजेंडे से है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य में सत्ताधारी दल सरकारी मशीनरी और अपने कैडर के दबाव का इस्तेमाल कर समाज पर एकतरफा सोच थोप रहे हैं। सावंत ने कहा कि सत्ता हासिल करने या वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को भड़काना और फैसले लेते समय अन्य नागरिकों के अधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आजीविका की अनदेखी करना लोकतंत्र व संविधान की मूल भावना पर सीधा हमला है।
Sachin Sawant Slams Ganeshotsav Liquor Ban – मीरा-भायंदर स्कूल की घटना का दिया उदाहरण; ‘धार्मिक आस्था का सम्मान हो, लेकिन थोपा न जाए’
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में मीरा-भायंदर के एक निजी स्कूल में हाल ही में सामने आई घटना का भी उल्लेख किया, जहां जैन समुदाय के पर्युषण पर्व के दौरान छात्रों को लहसुन, प्याज या कंदमूल युक्त भोजन टिफिन में न लाने की सलाह दी गई थी। सावंत ने कहा कि यह घटना भी उसी संकीर्ण मानसिकता का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में प्रत्येक नागरिक की धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं का पूरा सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी एक समूह की मान्यताओं को बाकी समाज के खान-पान या जीवनशैली पर जबरन थोपना अनुचित है। सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह सभी नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों और विविधता का संरक्षण करे।
Sachin Sawant Slams Ganeshotsav Liquor Ban – बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी लगाई थी प्रशासन को फटकार, वापस लेना पड़ा था मनमाना आदेश
सचिन सावंत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पुणे जिला प्रशासन द्वारा पूरे 10-12 दिनों के लिए शराब बंदी के जारी किए गए आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने वाइन शॉप और होटल एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन से तीखा सवाल किया था कि जब मुंबई या राज्य के बाकी हिस्सों में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है, तो केवल पुणे को ही क्यों निशाना बनाया गया। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और हस्तक्षेप के बाद पुणे प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने त्योहार के पहले दिन सीमित समय तथा विसर्जन के दिन को छोड़कर बाकी दिनों के पूर्ण प्रतिबंध का फैसला वापस ले लिया।
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