US India Defense Transport Aircraft – भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हैदराबाद स्थित टाटा-लॉकहीड मार्टिन एरोस्ट्रक्चर्स फैसिलिटी का दौरा कर दोनों देशों के बीच मजबूत होते औद्योगिक व रक्षा संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय वायुसेना (IAF) द्वारा खरीदे जाने वाले 80 मध्यम सैन्य परिवहन विमानों (MTA Deal) के संदर्भ में अमेरिकी रक्षा क्षेत्र की पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराते हुए ‘मेक इन इंडिया’ और सह-उत्पादन (Co-Production) को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
US India Defense Transport Aircraft – हैदराबाद में टाटा-लॉकहीड मार्टिन प्लांट का दौरा, ‘मेक इन इंडिया’ की सराहना
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हैदराबाद में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और अमेरिकी एयरोस्पेस दिग्गज लॉकहीड मार्टिन के संयुक्त उपक्रम का मुआयना किया। इस संयंत्र में सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमानों के महत्वपूर्ण ढांचों (Empennage) और पुर्जों का निर्माण किया जाता है, जिनकी आपूर्ति वैश्विक स्तर पर होती है। राजदूत ने भारतीय इंजीनियरों के तकनीकी कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों देशों का साझा रक्षा निर्माण हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती प्रदान कर रहा है।
US India Defense Transport Aircraft – 80 ट्रांसपोर्ट विमानों के लिए सी-130जे सुपर हरक्यूलिस की मजबूत दावेदारी
भारतीय वायुसेना अपने पुराने होते परिवहन बेड़े (एएन-32 और आईएल-76) को बदलने के लिए 18 से 30 टन पेलोड क्षमता वाले 40 से 80 मध्यम परिवहन विमान (MTA) खरीदने की प्रक्रिया में है। लॉकहीड मार्टिन ने भारत में ही सी-130जे विमानों के निर्माण और फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय वायुसेना पहले से ही 12 सी-130जे विमानों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है, जिसके चलते अमेरिकी पक्ष इसे भारतीय जरूरतों के लिए सबसे परखा हुआ और विश्वसनीय विकल्प मान रहा है।
US India Defense Transport Aircraft – वैश्विक प्रतिस्पर्धा और उच्च तकनीक हस्तांतरण पर फोकस
इस बहु-अरब डॉलर के मेगा रक्षा सौदे में अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन का मुकाबला ब्राजील की एम्ब्रायर (KC-390 मिलेनियम) और यूरोपीय एयरबस (A-400M) से है। केंद्र सरकार की प्राथमिकता देश में पूर्ण विनिर्माण और उन्नत तकनीक हस्तांतरण (ToT) हासिल करने की है। अमेरिकी राजदूत के इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका न केवल भारत को अत्याधुनिक रक्षा उत्पाद बेचने का इच्छुक है, बल्कि संयुक्त अनुसंधान, घरेलू विनिर्माण और व्यापक औद्योगिक साझेदारी के जरिए दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है।
Post View : 65436






























