US Counter Strategy Strait Of Hormuz – पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों पर ईरान के बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने एक नई कूटनीतिक और रणनीतिक योजना तैयार की है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल के परिवहन को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर होर्मुज और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में नए सुरक्षित गलियारे (सिक्योर मैरीटाइम कॉरिडोर) और निगरानी तंत्र स्थापित कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरानी नौसेना द्वारा जहाजों को रोकने या जब्त करने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह विफल करना है।
US Counter Strategy Strait Of Hormuz – होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत और ईरानी धमकियां
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट माना जाता है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। हाल के दिनों में अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते विवाद के चलते ईरान कई बार इस मार्ग को बंद करने अथवा वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुका है। तेल आपूर्ति में किसी भी संभावित रुकावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा बना रहता है।
US Counter Strategy Strait Of Hormuz – नौसैनिक सुरक्षा घेरा और उन्नत सैटेलाइट ट्रैकिंग का सहारा
अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को मजबूत करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के लिए आधुनिक सैटेलाइट ट्रैकिंग, ड्रोन निगरानी और युद्धपोतों की गश्त तेज कर दी है। योजना के अनुसार, संवेदनशील मार्गों से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों को गुप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और सुरक्षित नेविगेशन चैनल प्रदान किए जाएंगे। आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया नौसैनिक बलों (क्विक रिएक्शन फोर्स) को भी अलर्ट मोड पर तैनात किया जा रहा है।
US Counter Strategy Strait Of Hormuz – वैकल्पिक पाइपलाइन और जमीनी गलियारों के उपयोग पर भी जोर
जलमार्गों के अलावा अमेरिका खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों के विस्तार पर भी काम कर रहा है। इसमें सऊदी अरब की ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ और यूएई की ‘हबशान-फुजैराह पाइपलाइन’ जैसी परियोजनाओं के माध्यम से होर्मुज जलमार्ग से बचे बिना सीधे लाल सागर और ओमान की खाड़ी तक तेल पहुंचाने की क्षमता को बढ़ावा देना शामिल है। इस कदम से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को एक नया बैकअप मिलेगा और ईरान के दबाव बनाने के प्रयासों पर लगाम लगेगी।
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