बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जांच टीम ने हरियाणा के सोनीपत जिले से 12वें संदिग्ध आरोपी को हिरासत में लिया है। उसकी पहचान अमन के रूप में हुई है। पुलिस को संदेह है कि आरोपी ने फायरिंग की साजिश में शामिल लोगों तक पैसे पहुंचाने में भूमिका निभाई थी। यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है, जिसमें टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर और एक राहगीर को गोली लगी थी। अभिनेता इस हमले में सुरक्षित बच गए थे। पुलिस ने मामले की गंभीरता और कथित संगठित अपराध से संबंधों को देखते हुए महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) की धाराएं भी लागू की हैं।
हरियाणा के सोनीपत से 12वां संदिग्ध हिरासत में, पैसों के लेनदेन की जांच
मुंबई क्राइम ब्रांच ने टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा के सोनीपत जिले में कार्रवाई की है। स्थानीय पुलिस के सहयोग से रोहना गांव में छापेमारी कर अमन नाम के एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अमन का संबंध इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी कुणाल जामिनसिंह से बताया जा रहा है। कुणाल पर कथित तौर पर फायरिंग में इस्तेमाल हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है।
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमन के बैंक खाते में अनिल पंडित नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति की ओर से पैसे भेजे जाने का शक है। अनिल पंडित को पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित तौर पर जुड़ा हुआ मान रही है।
पुलिस को संदेह है कि अमन ने अपने बैंक खाते से यह रकम निकालकर कुणाल को दी थी। इस पैसे का इस्तेमाल हथियार खरीदने और हमलावरों तक पहुंचाने के लिए किया गया हो सकता है।
हालांकि, अमन की कथित भूमिका और पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी अभी जांच के अधीन है।
क्राइम ब्रांच की टीम उसे हरियाणा की अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लेने की प्रक्रिया में है, ताकि उसे आगे की पूछताछ के लिए मुंबई लाया जा सके।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमले की साजिश में किन लोगों ने आर्थिक सहायता दी और हथियारों की खरीद से लेकर उन्हें मुंबई पहुंचाने तक किसकी क्या भूमिका थी।
18 अक्टूबर को जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर चली थीं गोलियां, ड्राइवर समेत दो घायल
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी।
पुलिस के अनुसार, अभिनेता जुहू स्थित पुष्पा नरसी पार्क के पास फुटबॉल खेलने के बाद अपनी कार से निकल रहे थे। इसी दौरान मोटरसाइकिल से आए हमलावरों ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाकर कई राउंड फायरिंग की।
हमले के दौरान टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर और वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति को गोली लग गई।
घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया और मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
फायरिंग के तुरंत बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए कई टीमें गठित कीं और सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जानकारी तथा अन्य सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
19 अक्टूबर को पुलिस ने दो कथित शूटरों और उन्हें भागने में मदद करने वाले एक अन्य संदिग्ध को कोटा रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ा था।
इसके बाद जांच के दौरान हथियारों की आपूर्ति, आर्थिक सहायता और अन्य व्यवस्थाओं में कथित रूप से शामिल कई लोगों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया।
मुंबई पुलिस ने गुजरात के सूरत से दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं। जांच अधिकारियों को संदेह है कि इन हथियारों का संबंध टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी से हो सकता है।
पुलिस इस मामले में हथियारों के स्रोत और फायरिंग के पीछे की वास्तविक साजिश का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
फायरिंग मामले में MCOCA लागू, 11 आरोपी 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस ने संगठित अपराध की आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के प्रावधान लागू किए हैं।
यह मामला 19 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) और 3(5), तथा आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 के तहत दर्ज किया गया था।
बाद में जांच के दौरान कथित संगठित अपराध से संबंधित जानकारी सामने आने पर पुलिस ने 27 अक्टूबर को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी प्राप्त की। इसके बाद मामले में MCOCA की धारा 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) जोड़ी गईं।
29 अक्टूबर को मामले में पहले गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों को विशेष MCOCA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी 11 आरोपियों को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के जरिए हथियारों की खरीद, आर्थिक लेनदेन और कथित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना जरूरी है।
पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अनिल पंडित नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति ने सोशल मीडिया और ऑडियो संदेश के माध्यम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था।
हालांकि, इस दावे की प्रमाणिकता और हमले में किसी संगठित गिरोह की वास्तविक भूमिका की जांच अभी जारी है।
अब हरियाणा से पकड़े गए नए संदिग्ध के जरिए पुलिस को फायरिंग की साजिश से जुड़े आर्थिक लेनदेन और हथियारों की आपूर्ति के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।
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