Mumbai Sea Level Rise BMC Assessment – ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते समुद्र स्तर से मुंबई के निचले इलाकों के जलमग्न होने के गंभीर खतरे को देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने एक नया व्यापक क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट (जलवायु जोखिम मूल्यांकन) शुरू किया है। पिछले पांच वर्षों में यह दूसरा मौका है जब नागरिक निकाय शहर की 149 किलोमीटर लंबी तटीय पट्टी का गहन सर्वेक्षण कर रहा है। वर्ष 2022 में जारी पहले मुंबई क्लाइमेट एक्शन प्लान (MCAP) के बाद शहर के तटीय इलाकों में हुए भारी बदलावों, रिक्लेमेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए यह अध्ययन किया जा रहा है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट अगले वर्ष जारी होगी।
Mumbai Sea Level Rise BMC Assessment – कोस्टल रोड के लिए 100 हेक्टेयर भराव और सॉल्ट पैन विकास के बाद बदला मुंबई का भूगोल
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मुंबई की तटीय संरचना में बड़े बदलाव आए हैं। वेस्टर्न कोस्ट पर मुंबई कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए समुद्र से 100 हेक्टेयर से अधिक जमीन का रिक्लेमेशन किया गया है, जबकि ईस्टर्न कोस्ट पर नमक के मैदानों (सॉल्ट पैन लैंड्स) को विभिन्न विकास कार्यों के लिए खोला गया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक समुद्र स्तर लगातार बढ़ रहा है और सदी के अंत तक इसमें 0.5 से 2 मीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में मुंबई की स्थानीय भौगोलिक स्थिति और जनजीवन पर इन बदलावों के प्रभाव का सटीक आकलन करना बेहद जरूरी हो गया था।
Mumbai Sea Level Rise BMC Assessment – अरब सागर की सतह का बढ़ता तापमान चिंताजनक, 2050 तक दक्षिण मुंबई के बड़े हिस्से पर मंडरा रहा खतरा
वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि अरब सागर की सतह का तापमान (Sea Surface Temperature) लगातार बढ़ रहा है। 2022 के एमसीएपी के आंकड़ों के मुताबिक, अरब सागर के तापमान में हर साल 0.025 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अध्ययनों में पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक दक्षिण मुंबई के निचले इलाकों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हाई टाइड और अत्यधिक बारिश के दौरान जलभराव व बाढ़ की गंभीर चपेट में आ सकता है। समुद्र के बढ़ते स्तर और मानसूनी मूसलाधार बारिश का एक साथ होना मुंबई के लिए सबसे बड़ा संकट बन सकता है।
Mumbai Sea Level Rise BMC Assessment – अनियोजित कंक्रीटीकरण और मिठी नदी का सिकुड़ना बना चुनौती, मैंग्रोव संरक्षण ही एकमात्र बचाव
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई में जलभराव की समस्या केवल प्राकृतिक नहीं बल्कि अनियोजित विकास और जलनिकासी प्रबंधन की विफलता का भी परिणाम है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) का मैंग्रोव क्षेत्र पर बनना और मिठी नदी का सिकुड़ना प्राकृतिक पानी के प्रवाह को रोक चुका है। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा है कि मुंबई को भविष्य की इस समुद्री आपदा से बचाने के लिए तटीय मैंग्रोव (कच्छ वनस्पति) और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) को शहर के प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में बचाना अनिवार्य है। बीएमसी के इस नए असेसमेंट से भविष्य की विकास नीतियों और सुरक्षा दीवारों के निर्माण को सही दिशा मिलने की उम्मीद है।
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