India South Korea Revive K30 Biho Air Defence Talks Drone Shield – आधुनिक युद्धक्षेत्र में आत्मघाती ड्रोन, झुंड में आने वाले यूएवी (Drone Swarms) और लॉइटरिंग म्यूनिशन के तेजी से बढ़ते खतरों के बीच भारतीय सेना ने अपने मैकेनाइज्ड और बख्तरबंद फॉर्मेशन्स की हिफाजत के लिए एक पुराने मेगा प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित कर दिया है। भारत और दक्षिण कोरिया ने लंबे समय से अटके पड़े K30-बिहो (K30 Biho) हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम के सौदे को लेकर द्विपक्षीय बातचीत दोबारा शुरू कर दी है। इस सौदे का अनुमानित आकार लगभग 21,500 करोड़ से 22,400 करोड़ रुपये के बीच आंका जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि टैंकों और इन्फैंट्री कॉम्बैट वाहनों को आगे बढ़ने के लिए मोबाइल और बेहद तेज गति से मार करने वाले क्लोज-इन एयर डिफेंस शील्ड की सख्त आवश्यकता है।
India South Korea Revive K30 Biho Air Defence Talks Drone Shield – 2018 के ट्रायल्स में बिहो ने रूसी तुंगुस्का और पैंटसिर को पछाड़कर मारी थी बाजी
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में भारतीय सेना के सेल्फ-प्रोपेल्ड एयर डिफेंस गन-मिसाइल सिस्टम (SPAD-GMS) टेंडर के तहत दक्षिण कोरियाई कंपनी हनवा डिफेंस के K30 बिहो सिस्टम को तकनीकी मूल्यांकन और फील्ड ट्रायल्स के बाद सफल घोषित किया गया था। इस वैश्विक दौड़ में दक्षिण कोरिया ने रूस के अपग्रेडेड ‘तुंगुस्का-एम1’ और ‘पैंटसिर-एस1’ जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया था। हालांकि, उस समय रूस द्वारा टेंडर प्रक्रिया पर कड़ी आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराने और बाद में भारत सरकार द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत घरेलू रक्षा विनिर्माण पर जोर दिए जाने के कारण यह डील आधिकारिक रूप से ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब दोनों देशों के बीच नई रणनीतिक प्राथमिकताओं के तहत इन वार्ताओं को दोबारा गति दी गई है।
India South Korea Revive K30 Biho Air Defence Talks Drone Shield – 30mm ट्विन तोप और शिनगुंग मिसाइलों का घातक कॉम्बो; मोबाइल ड्रोन किलर तकनीक
K30-बिहो एक ट्रैक-माउंटेड (टैंक चेसिस पर आधारित) हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसमें 30mm की दोहरी ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट तोपों के साथ-साथ ‘शिनगुंग’ (Chiron) शॉर्ट-रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी होती हैं। इसकी तोपों की फायरिंग क्षमता प्रति मिनट 1,200 राउंड तक होती है और यह 3 किलोमीटर के दायरे में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन्स, क्रूज मिसाइलों और हेलिकॉप्टरों को छलनी कर सकती है, जबकि इसकी मिसाइलें 5 से 7 किलोमीटर दूर ही लक्ष्य को मार गिराती हैं। इसमें इन-बिल्ट रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (EOTS) मौजूद है, जो चलते-फिरते बख्तरबंद काफिले को लगातार 360-डिग्री हवाई सुरक्षा छत्र प्रदान करता है।
India South Korea Revive K30 Biho Air Defence Talks Drone Shield – ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी और मेक इन इंडिया की शर्त एलएंडटी हो सकती है प्रमुख पार्टनर
पुनर्जीवित हुई इन वार्ताओं में रक्षा मंत्रालय की प्राथमिक शर्त ‘मेक इन इंडिया’ और व्यापक ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) को सुनिश्चित करना है। इससे पहले भी दक्षिण कोरिया की हनवा डिफेंस ने भारत की निजी इंजीनियरिंग दिग्गज लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ मिलकर के-9 वज्र (K9 Vajra) होवित्जर तोपों का सफल स्थानीय उत्पादन किया है। सूत्रों के अनुसार, यदि K30-बिहो सौदा आगे बढ़ता है, तो शुरुआती सीमित खेप के बाद अधिकांश प्रणालियों का निर्माण घरेलू स्तर पर ही किया जाएगा, जिसमें भारतीय रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर कंपोनेंट्स का एकीकरण शामिल हो सकता है।
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