IAF Multirole Transport Aircraft – भारतीय वायुसेना (IAF) की रणनीतिक और सामरिक परिवहन क्षमताओं को नया आयाम देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का एक विशाल वैश्विक टेंडर (RFP) जारी किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत वायुसेना के लिए 60 मध्यम आकार के मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदे जाएंगे। यह रक्षा सौदा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत पूरा किया जाएगा, जिसमें विदेशी रक्षा कंपनियों को किसी भारतीय निजी या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के साथ मिलकर भारत में ही इन विमानों का निर्माण करना होगा।
IAF Multirole Transport Aircraft – पुराने AN-32 और IL-76 मालवाहक जहाजों की लेगा जगह
भारतीय वायुसेना वर्तमान में अपने परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने पर तेजी से काम कर रही है। नए 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बेड़े में शामिल होने के बाद दशकों पुराने एंतोनोव एएन-32 (AN-32) और इल्युशिन आईएल-76 (IL-76) मालवाहक जहाजों का स्थान लेंगे। इन नए विमानों की पेलोड क्षमता 18 से 30 टन के बीच होगी, जिससे दुर्गम और पहाड़ी सीमावर्ती इलाकों, जैसे लद्दाख और पूर्वोत्तर भारत में भारी सैन्य उपकरण और सैनिकों की तेजी से तैनाती में बड़ी मदद मिलेगी।
IAF Multirole Transport Aircraft – ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आरएफपी (Request for Proposal) के अनुसार, इस सौदे की मुख्य शर्त भारत में स्वदेशी तकनीक का विकास और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) है। विजेता वैश्विक मूल उपकरण निर्माता (OEM) को भारतीय विनिर्माण साझेदार के साथ मिलकर एक अंतिम असेंबली लाइन (FAL) स्थापित करनी होगी। इससे न केवल देश के भीतर रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि हजारों उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा होंगे और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।
IAF Multirole Transport Aircraft – वैश्विक रक्षा दिग्गजों के बीच लगी होड़, जल्द शुरू होगी परीक्षण प्रक्रिया
इस 1 लाख करोड़ रुपये के मेगा कॉन्ट्रैक्ट को हासिल करने के लिए वैश्विक एयरोस्पेस दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। लॉकहीड मार्टिन (C-130J), एम्ब्रेयर (C-390 मिलेनियम) और एयरबस (A400M) जैसी प्रमुख कंपनियां पहले ही इस परियोजना में गहरी रुचि दिखा चुकी हैं। प्रस्ताव मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय की तकनीकी मूल्यांकन समिति और वायुसेना द्वारा कठिन उड़ान परीक्षण (Field Evaluation Trials) किए जाएंगे, जिसके बाद अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
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