Mumbai Water Cut Controversy – मुंबई में जल संकट के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का एक फैसला विवादों में घिर गया है। एक तरफ जहां मुंबई के आम नागरिकों को लगातार पानी की कटौती (वाटर कट) का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीएमसी ने शहर के स्विमिंग पूलों को मिलने वाली जलापूर्ति को बहाल कर दिया है। बीएमसी के इस कदम से आम जनता और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है और नागरिक प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
Mumbai Water Cut Controversy – आम जनता पानी की किल्लत से परेशान, स्विमिंग पूलों को राहत
मुंबई के कई इलाकों में जलवाहिनी मरम्मत और झीलों के गिरते जलस्तर का हवाला देकर बीएमसी ने पिछले कुछ समय से पानी की कटौती लागू कर रखी है। शहर के मध्य और पश्चिमी उपनगरों के निवासी रोजाना पानी की कमी से जूझ रहे हैं और उन्हें महंगे पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे समय में बीएमसी प्रशासन द्वारा जिमखाना, निजी क्लबों और लग्जरी सोसायटियों के स्विमिंग पूलों के लिए पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू करने के निर्णय ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है।
Mumbai Water Cut Controversy – बीएमसी के दोहरे रवैये पर विपक्ष और नागरिकों ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों और स्थानीय निवासी कल्याण संघों (RWAs) ने बीएमसी के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। आलोचकों का कहना है कि जब आम लोगों को पीने और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, तब स्विमिंग पूलों जैसी विलासिता (लक्जरी) सुविधाओं के लिए पानी दिया जाना पूरी तरह अनुचित है। लोगों ने आरोप लगाया कि बीएमसी आम मुंबईकरों के हितों की अनदेखी कर रसूखदार वर्ग को प्राथमिकता दे रही है।
Mumbai Water Cut Controversy – बीएमसी प्रशासन की सफाई और पानी बचाओ अभियान पर असर
दूसरी ओर, बीएमसी के अधिकारियों का तर्क है कि स्विमिंग पूलों के लिए रीसाइक्लिंग और गैर-पेयजल मानकों का ध्यान रखा जा रहा है, हालांकि स्थानीय लोग इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं। इस विवाद ने बीएमसी द्वारा चलाए जा रहे पानी बचाओ अभियानों की विश्वसनीयता पर भी असर डाला है। नागरिकों की मांग है कि जब तक मुंबई के सभी हिस्सों में सामान्य रूप से पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हो जाती, तब तक स्विमिंग पूलों की सप्लाई पर रोक बरकरार रखी जानी चाहिए।
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