US Seeks Transparency – अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार से अपने रक्षा और खुफिया एजेंसियों के बजट को सार्वजनिक तथा संसदीय निगरानी के दायरे में लाने की पुरजोर सिफारिश की है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी वार्षिक ‘फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट’ में पाकिस्तान के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सैन्य और खुफिया फंड्स की अनियंत्रित गोपनीयता वित्तीय जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत है।
US Seeks Transparency – सैन्य और खुफिया बजट पर संसदीय नियंत्रण का अभाव
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सेना और गुप्तचर संस्थाओं का बजट पर्याप्त असैन्य और बजटीय समीक्षा से बाहर रहता है। वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद को सलाह दी है कि वह अपनी वित्तीय जवाबदेही में सुधार करने के लिए सैन्य खर्चों का ब्योरा संसद और जनता के सामने रखे। इसके अलावा समय पर कार्यकारी बजट प्रस्ताव (Executive Budget Proposal) सार्वजनिक न करने पर भी अमेरिका ने नाराजगी जताई है।
US Seeks Transparency – सरकारी कर्ज और सार्वजनिक उपक्रमों के छिपे देनदारियों पर उठाए सवाल
रिपोर्ट में केवल सैन्य खर्च ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सरकारी कर्ज और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (SOEs) से जुड़े वित्तीय दायित्वों की अपूर्ण जानकारी पर भी निशाना साधा गया है। वाशिंगटन ने कहा कि सरकार द्वारा केवल सीमित डेटा सार्वजनिक किया जाता है, जिससे वैश्विक वित्तीय संस्थाओं और जनता को वास्तविक स्थिति का पता नहीं चलता। हालांकि, रिपोर्ट ने पाकिस्तान के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान (Auditor General) की स्वतंत्रता और रिपोर्टिंग मानकों की सराहना भी की है।
US Seeks Transparency – 3 ट्रिलियन के रक्षा बजट के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा
पाकिस्तान द्वारा अपने रक्षा आवंटन को बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने के बीच अमेरिकी मूल्यांकन का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है। आर्थिक तंगी और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज पर निर्भरता के बावजूद पाकिस्तान के सैन्य खर्चों में बढ़ोतरी और गोपनीय मदों में फंड के इस्तेमाल ने वैश्विक बिरादरी की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका की इन सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में वित्तीय पारदर्शिता लाना और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकना है।
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