Maharashtra Hindi Language Exam Cancelled – महाराष्ट्र की राजनीति में भाषा और मराठी अस्मिता के मुद्दे पर जारी बहस के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सरकार के इस नए आदेश के साथ ही वर्ष 1976 और 1981 से चले आ रहे करीब पांच दशक पुराने उस नियम पर भी पूर्ण विराम लग गया है, जिसके तहत सरकारी सेवा में पदोन्नति और वेतन वृद्धि के लिए हिंदी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य बनाया गया था। राज्य सरकार द्वारा जारी यह निर्णय 7 मई 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
Maharashtra Hindi Language Exam Cancelled – मनसे की आंदोलन की चेतावनी और विपक्षी दलों की घेराबंदी के बाद फैसला
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब भाषा संचालनालय ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 28 जून को हिंदी परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की थी। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इसका सबसे मुखर विरोध किया और इसे केंद्र के इशारे पर हिंदी थोपने की कोशिश बताते हुए परीक्षा केंद्रों पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसके साथ ही शिवसेना (UBT) और ‘मराठी अभ्यास केंद्र’ से जुड़े भाषाविदों व एक्टिविस्टों ने सवाल उठाया था कि जब महाराष्ट्र में प्रशासनिक कामकाज की भाषा मराठी है, तो कर्मचारियों पर हिंदी परीक्षा की बाध्यता क्यों लादी जा रही है। बढ़ते चौतरफा राजनीतिक दबाव के चलते सरकार को यह परीक्षा व्यवस्था रद्द करनी पड़ी।
Maharashtra Hindi Language Exam Cancelled – इंक्रीमेंट और पदोन्नति के लिए अब हिंदी परीक्षा की अनिवार्यता खत
पुराने नियमों के अनुसार, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने 10वीं कक्षा तक हिंदी विषय का अध्ययन नहीं किया था, उन्हें सेवा के दौरान भाषा संचालनालय द्वारा आयोजित हिंदी परीक्षा पास करनी होती थी। परीक्षा पास न करने की स्थिति में उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) और प्रमोशन प्रभावित होने का जोखिम रहता था। सरकार के ताजा शासन निर्णय (GR) के बाद कर्मचारियों को इस बाध्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है, जिससे सेवा में कार्यरत हजारों गैर-हिंदी भाषी अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
Maharashtra Hindi Language Exam Cancelled – सरकार का तर्क: राज्य में कामकाज मराठी में, अंतरराज्यीय पत्राचार अंग्रेजी में
शासन निर्णय में 1976 और 1981 के पुराने आदेशों और परिपत्रकों को अधिक्रमित (रद्द) करते हुए सरकार ने तर्क दिया है कि महाराष्ट्र के भीतर प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह मराठी भाषा में संचालित होता है, जबकि अन्य राज्यों और केंद्र के साथ आधिकारिक पत्राचार के लिए अंग्रेजी का उपयोग किया जाता है। ऐसे में राज्य कर्मचारियों पर अलग से हिंदी परीक्षा का बोझ बनाए रखने का कोई प्रशासनिक औचित्य नहीं था। इस निर्णय को राज्य में मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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