शाहिद अंसारी
मुंबई:मुंबई के जेजे हास्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे इस सीनियर सिटीज़न मरीज़ का नाम अब्दुल वदूद खान है।जो कि कैंसर जैसी बीमारी का शिकार होचुके हैं।इस इलाज के लिए अब्दुल वदूद खान को मुंबई के जेजे अस्पताल मे भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों ने इलाज के लिए 78890 रूपए का बिल बनाया।
इस बात को देख कर मरीज़ ने राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहेत अपना इलाज करवाने के लिए जेजे अस्पताल को अपने कागज़ात सौंपे लेकिन जेजे अस्पताल ने यह कहकर एलाज करने से इंकार किया कि जेजे अस्पताल में अबतक राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहेत कई फाइलें रुकी हुई हैं।और जबतक इन फाइलों को निपटारा नहीं होगा वह मरीज़ का राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहेत ऑपरेशन नहीं करेंगे।
इस बारे में जेजे हास्पिटल के डॉक्टर अविनाश गुट्टे से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनको लिखित रूप से यह निर्देष दिया गया है कि जेजे हास्पिटल में राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहत किसी भी मरीज़ का इलाज नहीं किया जाएगा।यदि मरीज गडरीब है या वह पैसों का बंदोबस्त नहीं कर सकते तो उसके लिए उन्हें की और रास्ता अपनाना पड़ेगा।जब उनसे सवाल किया गया कि राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहेत जब मरीज़ ने अपनी सारी प्रक्रिया पूरी की तो अब उनका इलाज इस स्कीम के तहेत क्यों नहीं किया जा रहा तो डॉक्टर अविनाश गुट्टे ने कहा कि इसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।
क्या है राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना
राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2012 मे लांच की थी। योजना के तहत सरकार निचले – गरीब तबके के बीमार लोगों के इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान करती है। किडनी के ट्रांसप्लांटेशन के लिए ये सहायता राशि 2,50,000 रुपये है राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहत ह्रदयरोग, कैंसर, प्लास्टिक सर्जरी, स्त्री रोग, नेत्र रोग, मोतियाबिंद समेत 972 से ज़्यादा बीमारियों के इलाज में सहायता दी जाती है। महाराष्ट्र के सभी सरकारी अस्पतालों मे उपलब्ध इस योजना के मुताबिक मरीज के इलाज के लिए सरकार अपने कोष से अस्पताल को पैसा देती है। किडनी ट्रांसप्लान्टेशन को छोड़ दिया जाए, तो इलाज का खर्च डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा होने पर मरीज या उसके परिवार को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। लेकिन 50 बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल में ये सुविधा सिर्फ 4 मरीजों को दी जा सकती है, इसीलिए कई मरीजों को इस सुविधा का लाभ उठाने का लंबा इंतज़ार करना पड़ता है
योजना का फायदा कैसे उठाएं
इस योजना का लाभ उठा कर किसी भी सरकारी अस्पताल में डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज करा सकते हैं बस शर्त ये है कि आपकी आय 1 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आपके 2 या 2 से कम बच्चे होने चाहिए।राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2012 मे लांच की थी।योजना के तहत सरकार निचले गरीब तबके के बीमार लोगों के इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान करती है। किडनी के ट्रांसप्लांटेशन के लिए ये सहायता राशि 2,50,000 रुपये है। राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के तहत ह्रदयरोग, कैंसर, प्लास्टिक सर्जरी, स्त्री रोग, नेत्र रोग, मोतियाबिंद समेत 972 से ज़्यादा बीमारियों के इलाज में सहायता दी जाती है। महाराष्ट्र के सभी सरकारी अस्पतालों मे उपलब्ध इस योजना के मुताबिक मरीज के इलाज के लिए सरकार अपने कोष से अस्पताल को पैसा देती है।
किडनी ट्रांसप्लान्टेशन को छोड़ दिया जाए तो इलाज का खर्च डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा होने पर मरीज या उसके परिवार को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। लेकिन 50 बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल में ये सुविधा सिर्फ 4 मरीजों को दी जा सकती है इसीलिए कई मरीजों को इस सुविधा का लाभ उठाने का लंबा इंतज़ार करना पड़ता है। इस योजना का लाभ उठा कर किसी भी सरकारी अस्पताल में डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज करा सकते हैं बस शर्त ये है कि आपकी आय 1 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आपके 2 या 2 से कम बच्चे होने चाहिए। राजीव गांधी जीवनदायी आरोग्य योजना के लिए आपको नीचे लिखे दस्तावेजों की ज़रूरत पड़ेगी।सालाना इंकम,राशन कार्ड,मरीज़ की बीमारी का विवरण,डॉक्टर का पत्र जिसमे बीमारी समेत खर्च का ज़िक्र हो,मरीज़ के तीन रंगीन फोटो।
लेकिन जेजे अस्पताल का यह रवय्या राज्य सरकार की इस योजना को ठेंगा दिखा रहा सरकार ने गरीबों की दिक्कतों को देखते हुए इस योजना की शुरूआत की थी।लेकिन जेजे हास्पिटल के इस रवय्ये के बाद साफ पता चलता है कि सरकार क इस योजना को लेकर सरकारी हास्पिटल गंभीर नहीं है ।जिसका नतीजा गरीब मरीज़ों को भुगतना पड़ता है।
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