शाहिद अंसारी
मुंबई:देखने में यह आम हो गया है हम अपनी आँखों से रोज़ इस तरह से लोगों को देखते हैं और बिल्कुल उसी तरह से उन्हें नज़र अंदाज़ करते हैं जैसे लोकल ट्रेन से दिखाई देने वाले वह सारे मंज़र जो रोज़ हम अपनी आँखों से देखते हैं और उसे नज़र अंदाज़ करते हुए रुकते वहीं हैं जहां हमारी मजिंल होती है।यह वीडियो को बनाने वाले सीनियर वकील एजाज़ नक़वी हैं।
रोज़मर्रा की तरह नक़वी कोर्ट से कार्यालय आने के बाद घर की तरफ निकल रहे थे चर्चगेट स्टेशन पर तकरीबन साढ़ पांच बजे की ट्रेन पकड़ी और अपने घर माहिम की तरफ़ रवाना हो गए।नक़वी ने फर्स्ट क्लास डब्बे में जैसे ही दाखिल हुए सीट खाली देख कर वह बैठ गए लेकिन पास ही खड़े एक बुज़ुर्ग पर नज़र पड़ी उन्होंने उनको सीट पर बैठने के लिए कहा और खुद दरवाज़े के पास आगए।वह दरवाज़े के पास खड़े थे और उन्हें कुछ महसूस हुआ कि उनके पांस में किसी का हाथ लग रहा है उन्होंने निगाहें नीचे की तो पता चला एक बीमार दुबला पतला लड़का बैठा हुआ है उन्होंने उठने के लिए कहा यह सोच कर कि कहीं भीड़ मे पिस न जाए।तभी उनकी नज़र उसके हाथ की मुट्ठी पर पड़ी बंधी मुट्ठी देख कर यह समझने मे देर नहीं लगी की वह कौन है।मरिन लाइंस स्टेशन आचुका था और फिर नक़वी ने उस बंधी मुट्ठी वाले लड़के से कुछ सवालात दागने शुरू कर दिए सवाल दागने का अंदाज कोर्ट वाला था लेकिन लहजे में नर्मी थी वह जानने की कोशिश कर रहे थे कि एक नौजवान नशे की लत में इस कदर कैसे लिप्त है।बात चीत का सिलसिला शुरू हुआ नौजवान 2016 में बिहार से मुंबई आया बांद्रा प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर रहता है।हाथों मे उन्होंने देखा एक छोटे से कपड़े में नशे की लिक्विड में भिगोया हुआ था।बात चीत मे सने बताया कि मस्जिद स्टेशन से वह एक महिला से 20 रूपए में खरीदता है।नक़वी ने उससे बात चीत मे पता किया कि पहली वाली जो ड्रग्स है वह अब नहीं मिलती उसने यह स्वीकार तो किया लेकिन वह अपनी ही दुनिया में गुम था।उसकी नज़रें नक़वी के मोबाइल पर पड़ी और फिर बात चीत अधूरी रह गई इसी दौरान ट्रेन एलफिस्टन स्टेशन पर रुकी और वह नीचे उतर गया।नक़़वी सोच मे पड़ गए कि लोग तो नोटबंदी को लेकर परेशान हैं लेकिन इन्हें तो बस फिक्र है अपनी दुनिया की।
Post View : 13































