
कथित पीड़िता और सिकंदर उर्फ़ राजू पुलिस,अलताफ़ लकड़ावाला
शाहिद अंसारी
मुंबई: 26/11 की पीड़िता के नाम पर सहानुभूति और रूपए बटोरने वाली अनीता गुप्ता (बदला हुआ नाम) के ज़रिए एक इंजीनियर पर लगाया गया रेप केस झूटा साबित हुआ।तक़रीबन एक साल तक जांच करने के बाद पालघर के तुलिंज पुलिस थाने ने इस मामले में बी समरी सह प्रॉसीक्युशन (झूटा मामला और शिकायतकर्ता के खिलाफ़ कार्रवाई)रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की।इस से पहले भी अनीता गुप्ता (बदला हुआ नाम) द्वारा 26/11 हमलों के पहले ही कुलाबा में आतंकियों को देखे जाने की बात कही थी जो कि मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में झूटी साबित हुई थी।
क्या था मामला
अनीता गुप्ता (बदला हुआ नाम) ने 22 जुलाई 2015 को नालासोपारा के तुलिंज पुलिस थाने में मुंबई के एक इंजीनियर के खिलाफ़ रेप की फ़र्ज़ी शिकायत दर्ज करवाई थी। इंजीनियर पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे शादी का झांसा देकर उसके साथ लंबे समय से सम्बंध बनाए और अब वह शादी से इंकार कर रहा है जिसके बाद अनीता गुप्ता (बदला हुआ नाम) ने तुलिंज पुलिस थाने में रेप केस दर्ज कराया था।
घटना के बाद
इस रेप केस के बाद इंजानियर ने गिरफ्तारी पूर्व ज़मानत ले ली और फिर मामले की तहकीकात चल पड़ी।इंजानियर ने अपनी बेगुनाही के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के दहलीज़ पर दस्तक दी लेकिन किसी ने एक न सुनी।तकरीबन 45 बार पुलिस थाने जाकर अपनी बेगुनाही के सुबूत देने के बाद इंजीनियर ने इस मामले को चुनौती देते हुए मुंबई हाई कोर्ट मे दस्तक दी।
पुलिस की जांच
पूरे मामले में पुलिस की जांच के बाद पता चला कि कथित पीड़िता ने इंजीनियर के दो पुराने बिल्डर साथी सिकंदर उर्फ राजू पुलिस और अल्ताफ लकड़ा वाला के साथ मिलकर वसूली की एक साज़िश रची और तुलिंज पुलिस थाने में रेप का झूटा मामला दर्ज कराया।पुलिस की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि यह रेप केस इंजीनियर को गिरफ़्तार करने और उनके परिवार को मानसिक उत्पीड़न देने,समाज में बदनामी,आर्थिक रूप नुकसान करने के लिए जान बूझ कर कथित पीड़िता,सिकंदर उर्फ़ राजू पुलिस और अल्ताफ लकड़ावाला ने किया था।हालांकि इंजीनियर ने न तो कभी कथित पीड़िता को देखा था और न मिला।सिंकदर और अल्ताफ़ लकड़ावाला के साथ व्यापार मे विवाद के चलते इंजीनियर ने उनके साथ कारोबरा करना बंद कर दिया था।सिकंदर और अल्ताफ़ तकड़ावाला ने मुबंई के कई पुलिस थाने और कई जगहों पर इंजीनियर के खिलाफ़ 30 से ज़्यादा झूटी शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन मुबंई मे कहीं दाल न गल सकी।जिसके बाद कथित पीड़िता सिकंदर और अल्ताफ़ ने मिलकर यह प्लान बनाया और तुलिंज पुलिस थाने में झूटा रेप केस दर्ज कराया।
जांच के बाद
तक़रीबन एक साल तक पुलिस की जांच चलती रही इस पूरे मामले में पुलिस ने 30 गवाहों के बयान दर्ज किए जिनमे कथित पीड़िता की साथी सारिका उपाध्याय कथित पीड़िता की मां और उसके दूसरे साथी का बयान दर्ज किया।पुलिस की जांच में कथित पीड़िता द्वारा दर्ज काराया गया रेप केस झूटा साबित हुआ।उसने अपने साथ हुई रेप की वारदात को अंधेरी में एक बंगले में बताया और यह कहा कि इंजीनियर की इस बंगले मे ऑफिस थी उसने उसे काम पर रखा था पुलिस ने जब बंगले के आस पास के सारे लोगों से पूछ ताछ की तो पता चला कि यहां कभी कोई ऑफिस थी ही नहीं और साल 2009 से ही यह बंगला सिकंदर उर्फ राजू पुलिस और अल्ताफ लकड़ावाला के कब्ज़े में था।
कथित पीड़िता का झूट दूसरी बार पकड़ा गया जब उसने इंजीनियर से खुद का संपर्क बताते हुए जो मोबाइल नंबर बताया वह नंबर इंजीनियर का न होकर किसी और का था जब पुलिस ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि वह इंजीनियर के संपर्क मे थी यह बात भी झूटी साबित हुई।वह तीन फोन इस्तेमाल करती है और उसके सारे फोन रात में ही चलते हैं जो कि एक भी फोन से इंजीनियर का संपर्क नहीं था।उस ने खुद को इंजीनियर की कंपनी में कर्मचारी बताया लेकिन जब पुलिस ने उस से सुबूत मांगा तो वह देने में नाकाम साबित हुई।अपने बयान में उसने कहा कि इंजानियर ने उसके साथ नालासोपारा स्तिथ उसके घर पर भी रेप किया लेकिन पुलिस ने जब इंजीनियर के लंबे समय का मोबाईल के टॉवर लोकेश सीडीआर निकाला तो कहीं से भी उसका लोकेशन नालासोपारा नहीं निकला।
पुलिस की भूमिका
साज़िशकर्ता कथित पीड़िता और उसके साथियों द्वारा साज़िश रच कर तुलिंज पुलिस थाने मे शिकायत दर्ज करवाने के बाद से ही पुलिस ने मामले में छानबीन करने लगी।इस मामले में पुलिस की जांच के बाद जब पता चला कि मामला झूटा है तो पुलिस नें 24 अक्तूबर 2015 को ही बी समरी रिपोर्ट कोर्ट में फाइल करनी चाही लेकिन एसपी पालघर शारदा राउत के प्रेशर के बाद इस मामले की फिर से जांच की गई और उसके बाद कथित पीड़िता का बयान पुलिस ने कोर्ट में दर्ज करवाया।मामला झूटा साबित होने के बाद से ही उस ने अपने झूट और साज़िश को छुपाने के लिए जांच अधिकारियों की वरिष्ठ अधिकारियों से झूटी शिकायत करनी शुरू कर दी ताकि उसके ज़रिए दाखिल करवाया गया झूटे रेप केस को जांच अधिकारी प्रेशर में आकर सच मान लें।
इस मामले के बाद इंजीनियर ने कहा कि मैंने कभी उसे देखा भी नहीं लेकिन एक साज़िश के तहेत मुझे रेप केस मे फंसा दिया गया ताज्जुब इस बात का कि इस मामले में शारदा राउत ने भी उन लोगों का सहयोग किया जिन्होंने मेरे खिलाफ़ साज़िश रची थी।जबकि मैंने किसी तरह का कोई गुनाह नहीं किया और कई बार शारदा राउत को भी आवेदन कर अपनी आप बीती सुनाई लेकिन उन्होंने कोई सहयोग करने के बजाए मेरे मामले में झूटी शिकायत करने वालों की ही सहायता की।मैं इसल मामले में मुबंई हाई कोर्ट मे दस्तक दूंगा जहा पहले से ही इस मामले की मैंने शिकायत की थी।
साल 2008 से लेकर 2013 तक महाराष्ट्र भर में झूटे और फ़र्जी रेप केस के 3123 ऐसे मामले हैं जिन्हें पुलिस ने खुद खारिज किया।यह मामले अधिकतर किसी साज़िश के तहेत या सुपारी के तहेत या वसूली के लिए किसी भी महिला के माध्यम से दर्ज कराए जाते हैं और इसके लिए बड़ी रक़म की वसूली की जाती है ताज्जुब इस बात का कि पुलिस भी इन मामलों मे उस साज़िश करने वाली गैंग के साथ शामिल हो जाती हैं ताकि झूटे आरोप गढ़ कर किसी भी शरीफ़ आदमी की ज़िदंगी और इज़्ज़त दांव पर लग जाए और वह इस को बचाने के लिए मुंह मांगी रक़म दे।
इस पीड़िता ने पहले ही 26/11 की पीड़िता बन कर जमकर सहानुभूति लूटी और पब्लिसिटी पाने के लिए इसने यह तक कह दिया कि इसने आतंकवादियों को 26/11 के पहले से ही मुंबई में देखा था।जिसके बाद हलचल मच गई और क्राइम ब्रांच ने मामले को गंभीरता से देखते हुए इस की छान बीन करनी शूरू कर दी तो पता चला कि यह बात झूटी निकली।उस समय यह मुबंई के कुलाबा मे रहती थी।उसके बाद मुंबई के वरली इलाके में रही फिर अंधेरी में और फिलहाल नालासोपारा में और जहां भी रही आस पास के लोगों से लड़ाई झगड़ा करती थी और जब पुलिस थाने की नौबत आती तो खुद को मासूम बताकर और 26/11 की पीड़िता बता कर लोगों से सहानुभूति बटोरती।फिलहाल यह नालासोपारा के इलाके में ब्युटी पार्लर चलाती है।
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