
बॉम्बे लीक्स ,दिल्ली
रेलवे ने दिल्ली में दो बड़ी और पुरानी मस्जिदों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। उत्तर रेलवे ने इन मस्जिदों पर हटाने का नोटिस चस्पा किया था। इस नोटिस पर लिखा था कि 15 दिनों में खुद हटा लें मस्जिद वरना रेलवे हटा देगा। रेलवे ने ये नोटिस दिल्ली के बंगाली मार्केट मस्जिद और तकिया बब्बर शाह मस्जिद पर लगाया है। इस नोटिस में रेलवे ने लिखा है कि ये उनकी जमीन पर बनी है। अब इस मामले पर दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अपना जवाब दिया है। वक्फ बोर्ड ने कहा कि मस्जिद की जमीन साल 1945 में कानून तौर पर एग्रीमेंट के तहत ट्रांसफर की गई थी।
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे ने दिल्ली की दो बड़ी मस्जिदों बंगाली मार्केट और आईटीओ स्थित तकिया बब्बर शाह को नोटिस जारी कर हटाने को कहा है।रेलवे ने नोटिस में दोनों मस्जिद प्रशासन को 15 दिन के अंदर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा है। वरना एक्शन लेने की चेतावनी भी दी है।रेलवे ने जो नोटिस जारी किया है, उसमें कहा- 15 दिन के अंदर अतिक्रमण हटा लें, वरना आकर हटाएंगे।वहीं, मस्जिद कमेटी का कहना है कि ये सैकड़ों साल पुरानी है। लेकिन रेलवे कह रहा है ये उनकी जमीन पर बनी है।उत्तर रेलवे प्रशासन की तरफ से ये नोटिस जारी किया गया है। इसमें लिखा है- रेलवे भूमि को अनाधिकृत रूप से अतिक्रमित किया हुआ है।आप लोग अनाधिकृत रूप से रेलवे की जमीन पर बने अनाधिकृति भवन/मंदिर/ मस्जिद/मजार को इस सूचना के 15 दिन के अंदर स्वेच्छा से हटा दें, अन्यथा रेलवे प्रशासन एक्शन लेगा।मस्जिद कमेटी का दावा है कि ये 250 और 500 साल पुरानी है मस्जिदे हैं। इस मामले पर कहा कि ये मस्जिद जिसके अंदर हुजरे, आंगन, शौचालय, चबूतरे आदि का कुल माप 0.095 एकड़ भूमि दिनांक 06.03.1945 को एक एग्रीमेंट के माध्यम से सुन्नी मजलिस औकाफ को काउंसिल में गवर्नर जनरल के मुख्य आयुक्त के द्वारा हस्तांतरित कर दी गई थी। ये एग्रीमेंट अतिरिक्त पुस्तक संख्या 1, खंड 95 में पृष्ठ 49 से 51 पर 278 नंबर से रजिस्टर्ड है। इस एग्रीमेंट से ये भी पता चलता है कि हुजरे (कमरे) और एक कुआं और एक स्नानघर वाली मस्जिद समझौते की तारीख पर पहले से ही अस्तित्व में थी।दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इस जवाब में ये भी कहा कि मौजूदा मामले में जिस मस्जिद की बात हो रही है वह 400 साल से भी अधिक समय से अस्तित्व में है। इसलिए, यह कहना कि संदर्भित मस्जिद रेलवे भूमि पर अतिक्रमण है, तथ्यों और कानून के विरुद्ध है। न तो ये जमीन रेलवे की है और न ही संदर्भित मस्जिद अतिक्रमण है।उपरोक्त सामग्री और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, आपको (रेलवे) सलाह दी जाती है कि संबंधित नोटिस को तत्काल प्रभाव से वापस लें/निरस्त करें और दिल्ली वक्फ बोर्ड को सूचित करें कि संबंधित नोटिस रद्द कर दिया गया है।हालांकि नोटिस मामले में एक नई जानकारी यह भी सामने आई है कि तकिया बब्बर शाह मस्जिद और बंगाली मार्केट की मस्जिद को ही नोटिस नहीं दिया गया है, बल्कि तकिया बब्बर शाह मस्जिद के करीब मौजूद नगर निगम के मलेरिया विभाग के ऑफिस को भी रेलवे ने हटाने का नोटिस दिया है और 15 दिन में इस विभाग के ऑफिस को भी हटाने की बात कही है। उत्तर रेलवे ने इस मामले में ये तो माना है कि नोटिस उन्हीं का है लेकिन कोई बयान देने से मना कर दिया है।
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