OBC Caste Census Column Rally – महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अधिकारों और सटीक आंकड़ों को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्र सरकार द्वारा कराई जाने वाली जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी अलग कॉलम निर्धारित करने की मांग को लेकर ओबीसी संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में ‘सकल ओबीसी महामोर्चा’ के तत्वावधान में आयोजित राज्यस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मांग को लेकर छत्रपति संभाजीनगर में एक विशाल राज्यव्यापी महामोर्चा निकाला जाएगा।
OBC Caste Census Column Rally – यशवंतराव चव्हाण सेंटर में जुटे पक्ष-विपक्ष के दिग्गज ओबीसी नेता
मुंबई में आयोजित इस अहम बैठक में विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार, सांसद डॉ. प्रशांत पडोले, पूर्व मंत्री महादेव जानकर, कुनबी समाज के प्रमुख नेता चंद्रकांत बावकर और सकल ओबीसी महामोर्चा के मुख्य संयोजक उमेश कोराम सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। नेताओं ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि डिजिटल और आधुनिक जनगणना के प्रारूप में ओबीसी वर्ग के लिए स्वतंत्र पहचान और अलग कॉलम की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे इस वर्ग की वास्तविक आबादी का सही आकलन नहीं हो पाएगा।
OBC Caste Census Column Rally – 7 सदस्यीय समन्वय समिति गठित, पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने का फैसला
आंदोलन की रूपरेखा और तारीख तय करने के लिए मराठवाड़ा सहित राज्यभर के ओबीसी प्रतिनिधियों के साथ आगामी बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके संचालन के लिए 7 सदस्यों की एक विशेष समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह समिति सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के सभी ओबीसी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से संपर्क साधेगी और उनसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मोर्चे में शामिल होने की अपील करेगी। साथ ही सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में ओबीसी कॉलम जोड़ने की मांग करने का आग्रह किया जाएगा।
OBC Caste Census Column Rally – ‘सटीक गिनती के बिना योजनाओं और बजट का लाभ मिलना नामुमकिन’: विजय वडेट्टीवार
बैठक को संबोधित करते हुए विजय वडेट्टीवार ने कहा कि महाराष्ट्र में ओबीसी वर्ग के अंतर्गत करीब 600 जातियां आती हैं, लेकिन प्रशासनिक आंकड़ों में लाखों विसंगतियां दिखाई देती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में ओबीसी समुदाय की वास्तविक जनसंख्या का आधिकारिक और स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तो उनकी आबादी के अनुपात में सरकारी नीतियां, बजटीय आवंटन, आरक्षण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ कैसे सुनिश्चित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मोर्चा आरक्षण का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक पहचान का अधिकार हासिल करने के लिए निकाला जा रहा है।
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