मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद ने मायानगरी के रियल एस्टेट बाजार में ‘प्योर वेज’ बनाम ‘नॉन-वेज’ की पुरानी बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके ताड़देव में स्थित लगभग 900 वर्ग फीट के एक 2BHK फ्लैट की बिक्री के लिए बनाए गए एक प्रोमोशनल वीडियो (रील) में रियल एस्टेट ब्रोकर भावेश कावरे ने एक अजीब शर्त रखी। ब्रोकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 6.5 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह आलीशान फ्लैट सिर्फ और सिर्फ ‘शुद्ध शाकाहारी’ खरीदारों के लिए ही उपलब्ध है और मांसाहार करने वाले लोगों को इसे बेचने पर विचार नहीं किया जाएगा। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही न केवल आम यूज़र्स बल्कि महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद: ब्रोकर का दावा और राजनीतिक दलों का कड़ा रुख
मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद में विवादित रील वायरल होने के बाद जब ब्रोकर भावेश कावरे से सवाल किए गए, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह शर्त उनकी अपनी नहीं बल्कि मकान मालिक की है, जो वारकरी संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, इस सफाई के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। शिवसेना (यूबीटी) की नेता किशोरी पेडनेकर ने इस पर नाराजगी जताते हुए ब्रोकर को ढूंढकर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी इस तरह के भेदभाव पर सवाल उठाए। इसके अलावा, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता यशवंत किल्लेदार ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि इस तरह का भेदभाव नहीं रुका तो उनकी पार्टी ‘मनसे स्टाइल’ में जवाब देगी।
मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद: मुंबई की सोसाइटियों में भोजन के आधार पर भेदभाव का इतिहास
मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद कोई पहला मामला नहीं है जब मुंबई में खाने-पीने की आदतों के आधार पर किसी को घर देने से मना किया गया हो। इससे पहले भी घाटकोपर, मुलुंड, कांदिवली और चांदिवली जैसे इलाकों में शाकाहारी सोसाइटियों द्वारा मांसाहारी लोगों को किराए पर या खरीदने के लिए फ्लैट न देने के मामले सामने आते रहे हैं। यहां तक कि बॉलीवुड हस्तियां भी इसका शिकार हो चुकी हैं। अभिनेता सैफ अली खान ने करीना कपूर से शादी के बाद घर ढूंढते समय कुछ हाउसिंग सोसाइटियों द्वारा रिजेक्ट किए जाने का खुलासा किया था, जबकि अभिनेता इमरान हाशमी ने भी 2014 में एक प्रतिष्ठित सोसाइटी पर भेदभाव का आरोप लगाया था।
मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद: व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम हाउसिंग सोसाइटी के अधिकार
मुंबई फ्लैट मांसाहारी विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी हाउसिंग सोसाइटी या मकान मालिक को किसी व्यक्ति की थाली के आधार पर घर देने से इंकार करने का अधिकार होना चाहिए? समर्थकों का मानना है कि ‘प्योर वेज’ सोसाइटियां विशेष जीवनशैली और धार्मिक मान्यताओं वाले निवासियों को अनुकूल माहौल प्रदान करती हैं। इसके विपरीत, आलोचकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि विविधता से भरे मुंबई जैसे महानगर में भोजन की पसंद के आधार पर किसी को आवास से वंचित करना सीधे तौर पर भेदभाव है। प्रॉपर्टी की अत्यधिक ऊंची कीमतों और भारी मांग के बीच खान-पान की शर्त लगाना रियल एस्टेट बाजार में निष्पक्षता के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल उठाता है।
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