India Germany – हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना की अंडरवाटर मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक प्रगति हुई है। भारत और जर्मनी के बीच लगभग 8 अरब डॉलर (करीब 70,000 करोड़ रुपये) की लागत वाले ‘प्रोजेक्ट-75 (इंडिया)’ के तहत छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण की डील अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। भारत के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की दिग्गज थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) ने अपनी रणनीतिक साझेदारी की वाणिज्यिक और औद्योगिक शर्तों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है। मुंबई में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में टीकेएमएस के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ने एमडीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन से मुलाकात कर इस मेगा प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन ढांचे पर सहमति जताई।
India Germany – जर्मन टाइप 214 डिजाइन पर आधारित होंगी 6 पनडुब्बियां; ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा पूरा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव जून 2025 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) से रखी गई थी। प्रस्तावित पनडुब्बियां जर्मनी के विश्वप्रसिद्ध ‘टाइप 214’ (Type 214) डिजाइन पर आधारित होंगी, जो अपने वर्ग में दुनिया की सबसे शांत और अत्याधुनिक स्टील्थ पनडुब्बियों में मानी जाती हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत सभी छह पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में अधिकतम स्वदेशी सामग्री के साथ किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत जर्मन कंपनी टीकेएमएस तकनीकी परामर्श, डिजाइन ब्लूप्रिंट और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता प्रदान करेगी, जबकि एमडीएल इसका वास्तविक निर्माण कर भारतीय नौसेना को सौंपेगी।
India Germany – एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) से लैस; पानी के भीतर 6 दिनों तक छिपे रहने की मिलेगी ताकत
इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी सामरिक ताकत इनमें लगने वाली उन्नत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी। पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियां चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है, जिससे वे दुश्मन के रडार और विमानों की पकड़ में आ जाती हैं। लेकिन जर्मन एआईपी सिस्टम पनडुब्बी को बिना सतह पर आए लगातार छह दिनों या उससे अधिक समय तक गहरे पानी में पूरी तरह अदृश्य रहने की क्षमता प्रदान करता है। इससे नौसेना की स्टील्थ क्षमता और युद्धक्षेत्र में टिके रहने की ताकत (Endurance) कई गुना बढ़ जाएगी। यह तकनीक पाकिस्तान की हालिया चीनी पनडुब्बियों के मुकाबले भारतीय नौसेना को तकनीकी बढ़त दिलाएगी।
India Germany – 16 में से 10 पनडुब्बियां तीन दशक पुरानी; बेड़े के संकट को दूर करने में साबित होगी गेमचेंजर
वर्तमान में भारतीय नौसेना 16 पारंपरिक पनडुब्बियों का संचालन कर रही है, जिनमें से 10 पनडुब्बियां 30 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं और उनके रिटायरमेंट का समय नजदीक है। 1980 के दशक में भारत ने जर्मनी के एचडीडब्ल्यू (अब टीकेएमएस) से चार पनडुब्बियां खरीदी थीं, जिनमें से दो का निर्माण एमडीएल में हुआ था। अब चार दशक बाद दोनों देशों का यह सहयोग नौसेना के घटते अंडरवाटर बेड़े को नया जीवन देने जा रहा है। इसके साथ ही भारत फ्रांस के साथ अतिरिक्त कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अटैक पनडुब्बियों (SSN) के विकास पर भी काम कर रहा है, जिससे नौसेना हिंद महासागर में पूर्ण नियंत्रण बनाए रख सके।
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