ADRDE Completes Ground Trial – भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता (Anti-Submarine Warfare – ASW) को स्वदेशी तकनीक से मजबूत करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख प्रयोगशाला एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एडीआरडीई ने नौसेना द्वारा संचालित हल्के टॉरपीडो (Lightweight Torpedoes) के लिए यूनिवर्सल फ्लाइट-इन-एयर मटेरियल (UFIAM) प्रणाली यानी ‘कॉमन एयर-लॉन्च सिस्टम’ के ग्राउंड इंटीग्रेशन परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही भारतीय नौसेना के विभिन्न हवाई प्लेटफार्मों से हवा से दागे जाने वाले टॉरपीडो के लिए एक एकीकृत और सार्वभौमिक लॉन्च समाधान के औपचारिक इंडक्शन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
ADRDE Completes Ground Trial – अलग-अलग लॉन्च मैकेनिज्म की जरूरत होगी खत्म; सार्वभौमिक प्रणाली से बढ़ेगी कार्यक्षमता
अब तक नौसेना के हेलीकॉप्टरों और समुद्री गश्ती विमानों में विभिन्न श्रेणियों और मूल के हल्के टॉरपीडो को लॉन्च करने के लिए अलग-अलग पैराशूट डिप्लॉयमेंट और अटैचमेंट सिस्टम की आवश्यकता होती थी, जिससे मेंटेनेंस और इन्वेंट्री का बोझ बढ़ता था। एडीआरडीई द्वारा विकसित यह नया कॉमन एयर-लॉन्च सिस्टम एक सार्वभौमिक (Universal) प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि हवा से टॉरपीडो गिराए जाने के दौरान पैराशूट सही समय पर खुले, उसकी गति नियंत्रित हो और पानी की सतह पर सटीक कोण पर प्रवेश हो सके ताकि टॉरपीडो के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और वारहेड को किसी झटके या नुकसान से बचाया जा सके।
ADRDE Completes Ground Trial – पी-8आई, सी किंग और एमएच-60आर रोमियो हेलीकॉप्टरों से टॉरपीडो दागना होगा आसा
ग्राउंड इंटीग्रेशन परीक्षणों के दौरान प्रणाली के संरचनात्मक स्थायित्व, रिलीज मैकेनिज्म और एयरोडायनामिक स्थिरता का कड़े मानकों पर सत्यापन किया गया। इस सफल परीक्षण के बाद अब इसे नौसेना के फ्रंटलाइन समुद्री निगरानी विमानों जैसे बोइंग पी-8आई (P-8I Poseidon) और पनडुब्बी रोधी हेलीकॉप्टरों जैसे एमएच-60आर (MH-60R Seahawk), सी किंग और स्वदेशी नौसैनिक ध्रुव (ALH) पर उड़ान परीक्षणों (Flight Trials) के लिए लगाया जाएगा। यह प्रणाली स्वदेशी ‘श्येन’ (TAL Shyena) टॉरपीडो के साथ-साथ विदेशी हल्के टॉरपीडो के साथ भी निर्बाध रूप से तालमेल बिठाने में पूरी तरह सक्षम है।
ADRDE Completes Ground Trial – ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा; विदेशी निर्भरता घटेगी और परिचालन लागत में आएगी कमी
एडीआरडीई की यह तकनीकी उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। स्वदेशी कॉमन एयर-लॉन्च प्रणाली के बेड़े में शामिल होने से विदेशी निर्माताओं पर महंगे स्पेयर पार्ट्स और तकनीक के लिए निर्भरता समाप्त होगी। इससे नौसेना को आपातकालीन परिस्थितियों में तीव्र तैनाती, आसान लॉजिस्टिक्स और कम लागत में रखरखाव की सुविधा मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती पनडुब्बी चुनौतियों के बीच यह प्रणाली भारतीय नौसेना की हवाई पनडुब्बी रोधी मारक क्षमता को और अधिक अचूक व घातक बनाएगी।
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