Missiles Leverage – दशकों तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक देशों में शुमार रहने वाला भारत अब वैश्विक सामरिक पटल पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक और रक्षा कूटनीति (Defense Diplomacy) के बड़े खिलाड़ी के रूप में तेजी से उभर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के दम पर विकसित स्वदेशी हथियार प्रणालियां—विशेष रूप से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर—अब केवल सैन्य तैयारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई दिल्ली की विदेश नीति में रणनीतिक लाभ (Strategic Leverage) हासिल करने का सबसे मजबूत औजार बन चुकी हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर पश्चिम एशिया और काकेशस क्षेत्र तक मित्र राष्ट्रों को अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति कर भारत न केवल अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहा है, बल्कि पारंपरिक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकाधिकार को भी सीधी चुनौती दे रहा है।
Missiles Leverage – फिलीपींस से लेकर आर्मेनिया तक; हथियारों की डिलीवरी से बदला क्षेत्रीय शक्ति संतुलन
भारत के रक्षा निर्यात के क्षेत्र में सबसे बड़ा रणनीतिक कदम फिलीपींस को तटीय रक्षा के लिए 37.5 करोड़ डॉलर के ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की सफल आपूर्ति रहा। दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच इस प्रणाली की तैनाती ने भारत को आसियान (ASEAN) क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित किया है। इसके अलावा काकेशस क्षेत्र में अजरबैजान के साथ सीमा तनाव झेल रहे आर्मेनिया को आकाश मिसाइल सिस्टम, पिनाका रॉकेट सिस्टम और एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) की आपूर्ति कर भारत ने यूरेशियाई भू-भाग में अपनी रणनीतिक उपस्थिति का विस्तार किया है। इन सौदों ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब पश्चिमी और रूसी रक्षा प्लेटफार्मों का एक विश्वसनीय, लागत प्रभावी और उन्नत विकल्प प्रदान कर रहा है।
Missiles Leverage – रिकॉर्ड 21,000 करोड़ के पार रक्षा निर्यात; निजी और सार्वजनिक क्षेत्र का साझा दम
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 में रिकॉर्ड 21,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका था, जो 2026-27 तक 50,000 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस अभूतपूर्व वृद्धि में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ टाटा, कल्याणी और एलएंडटी जैसी निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों का योगदान बेहद निर्णायक रहा है। गोला-बारूद, रडार, नाइट-विजन डिवाइसेज और बख्तरबंद वाहनों की 85 से अधिक देशों में आपूर्ति कर भारत ने अपनी घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता का लोहा मनवाया है।
Missiles Leverage – केवल व्यापार नहीं बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा साझेदारी; रक्षा कूटनीति से बढ़ रहा वैश्विक रुतबा
सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा निर्यात केवल विदेशी मुद्रा अर्जित करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह दो देशों के बीच 20 से 30 वर्षों की दीर्घकालिक रणनीतिक निर्भरता और साझेदारी स्थापित करता है। हथियारों की बिक्री के साथ मेंटेनेंस, अपग्रेड, स्पेयर पार्ट्स और संयुक्त सैन्य अभ्यास का चक्र जुड़ता है, जिससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समर्थन जुटाने में मदद मिलती है। मित्र देशों को रक्षा हथियारों से लैस करके भारत अपनी सीमाओं से परे एक अनुकूल भू-सामरिक वातावरण तैयार कर रहा है। यह बदलता रुख स्पष्ट संकेत है कि 21वीं सदी की वैश्विक भू-राजनीति में भारत अब एक मूक दर्शक नहीं, बल्कि नियम तय करने वाला एक निर्णायक शक्ति केंद्र बन चुका है।
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