Fake PMO ID Case Rohan Parekh AI Tools – मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित लक्जरी मॉल जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का कथित फर्जी पहचान पत्र दिखाकर घुसने के हाई-प्रोफाइल मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक तकनीकी जांच में सामने आया है कि 24 वर्षीय मुख्य आरोपी रोहन प्रेमल पारेख ने प्रधानमंत्री कार्यालय का नकली पहचान पत्र और फर्जी नियुक्ति दस्तावेज तैयार करने के लिए आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और ग्राफिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया था। जांच एजेंसियों ने आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त कर फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए भेज दिया है।
Fake PMO ID Case Rohan Parekh AI Tools – एआई सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स के जरिए तैयार की थी ‘ग्रेड-सी’ अधिकारी की फर्जी आईडी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रोहन पारेख ने पूछताछ के दौरान पहले यह दावा किया था कि उसे अज्ञात व्यक्तियों द्वारा ईमेल पर यह पहचान पत्र भेजा गया था। हालांकि, साइबर विशेषज्ञों द्वारा उसके जब्त किए गए फोन और डिजिटल खातों की जांच के बाद यह पाया गया कि आरोपी ने खुद विभिन्न ऑनलाइन एआई टूल्स, टेम्पलेट्स और इमेज-एडिटिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करके प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक लोगो, भारत सरकार के राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) और फर्जी सील को सटीक तरीके से तैयार किया था। इसके जरिए उसने खुद को रक्षा और सलाहकार मामलों से जुड़ा ‘ग्रेड-सी पीएमओ अधिकारी’ दर्शाने वाला डिजिटल कार्ड बनाया।
Fake PMO ID Case Rohan Parekh AI Tools – हथियारबंद बॉडीगार्ड को भी झांसे में रखकर दिखाया था अपना फर्जी रसूख
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि रोहन ने इस फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल केवल वीआईपी जगहों पर प्रवेश के लिए ही नहीं, बल्कि अपने आसपास रसूखदार माहौल बनाने के लिए भी किया। उसने अपने निजी सुरक्षा गार्ड दिलीप राजाराम कुंडे को यह विश्वास दिलाया था कि वह केंद्र सरकार के एक संवेदनशील विभाग में कार्यरत है, जिसके चलते उसे 24 घंटे सुरक्षा की आवश्यकता है। हालांकि, जब मॉल के सुरक्षा गेट पर मेटल डिटेक्टर जांच के दौरान कुंडे के पास पिस्तौल पकड़ी गई और आईडी कार्ड की सत्यता जांची गई, तो वैधता की तारीख और आधिकारिक क्यूआर कोड की अनुपस्थिति ने इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया।
Fake PMO ID Case Rohan Parekh AI Tools – अन्य वीआईपी प्रतिष्ठानों में प्रवेश की पड़ताल, डिजिटल फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट का इंतजार
मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या रोहन पारेख ने इस फर्जी एआई-जनरेटेड पीएमओ पहचान पत्र का इस्तेमाल मुंबई या अन्य शहरों के अन्य वीआईपी आयोजनों, पांच सितारा होटलों या सरकारी प्रतिष्ठानों में अनुचित लाभ उठाने के लिए किया था। पुलिस ने आरोपी के सभी सोशल मीडिया प्रोफाइल, क्लाउड स्टोरेज और एआई प्लेटफॉर्म सब्सक्रिप्शन की हिस्ट्री खंगालनी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) से विस्तृत डिजिटल रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
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