मुंबई में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है, जहाँ मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले पांच बोगस डॉक्टरों को बेनकाब किया है। इन कथित डॉक्टरों के पास न तो कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री थी और न ही महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल का वैध पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन)। इसके बावजूद ये आरोपी लंबे समय से क्लिनिक चलाकर मरीजों का इलाज कर रहे थे और उनसे फीस वसूल रहे थे। क्राइम ब्रांच की यूनिट 6 और 8 ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर इस संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया और पांचों आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा।
देवनार और बांद्रा ईस्ट के 5 क्लिनिकों पर क्राइम ब्रांच की छापेमारी
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मुंबई के देवनार स्थित जाकिर हुसैन नगर में चार और बांद्रा ईस्ट के नौपाड़ा इलाके में एक क्लिनिक अवैध रूप से चलाया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीमों ने बीएमसी के मेडिकल ऑफिसरों को साथ लेकर अचानक छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से करीब 1,19,324 रुपये मूल्य के इंजेक्शन, सिरिंज, विभिन्न बीमारियों की दवाएं और अन्य मेडिकल उपकरण जब्त किए। ये सभी सामान बिना किसी वैध डॉक्टर की देखरेख या पर्चे के मरीजों को दिए जा रहे थे।
गिरफ्तार और नामजद आरोपियों की पहचान आई सामने
पुलिस द्वारा की गई जांच और पूछताछ में पकड़े गए पांचों आरोपियों की पहचान उजागर हुई है। इनमें सगीर अहमद अब्दुल माजिद हाशमी (39), अखिलेश कुमार देवेंद्र कुमार दुबे (47), मेहमुद आलम मोहम्मद शरीफ शेख (36), केशव प्रसाद कुद्दुर पटेल (56) और मोहम्मद आफताब शौकिकम खान (56) शामिल हैं। प्राथमिक जांच में पाया गया कि ये आरोपी साधारण बीमारियों से लेकर गंभीर समस्याओं तक का इलाज खुद को डॉक्टर बताकर कर रहे थे। मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया गया है।
देवनार और निर्मल नगर थाने में आपराधिक मामले दर्ज
मान्यता प्राप्त डिग्री या लाइसेंस के बिना मेडिकल प्रैक्टिस करना कानूनन अपराध है। मरीजों की सेहत और जान को खतरे में डालने के आरोप में इन पांचों बोगस डॉक्टरों के खिलाफ देवनार पुलिस स्टेशन और निर्मल नगर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं (जैसे महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि ये आरोपी कब से यह अवैध कारोबार चला रहे थे और इन्हें दवाइयों की सप्लाई कहाँ से मिल रही थी।
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