
बॉम्बे लीक्स, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की सियासत में में इस समय कोहराम बरपा है।राजनीति के धुरंधर कहे जाने वाले शरद पवार के निशाने पर भाजपा और देवेन्द्र फडणवीस है।तो जवाबी पलटवार में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेन्द्र फडणवीस पवार के बयानों पर विश्वासघात किये जाने की बात कर रहे है।दरअसल महाराष्ट्र में साल 2019 में बीजेपी और एनसीपी के गठबंधन वाली सरकार बनने के बाद महज़ 80 घंटे के भीतर ही एनसीपी ने गठबंधन तोड़ दिया था। अब इसपर फडणवीस और शरद पवार के बीच ताजा बयानबाजी से एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत तेज हो गई है।एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इसे अब अपनी गुगली बता दिया देवेंद्र फडणवीस विश्वासघाती बता रहे।
दरअसल एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बयान दिया है कि उनकी तरफ से भाजपा और उसकी सत्ता के प्रति लालसा उजागर करने के लिए 2019 में “कुछ चीजें रची गईं। उन्होंने कहा कि पवार 2019 में भाजपा के साथ सरकार बनाने के लिए सहमत तो हो गए थे। लेकिन आखिरी क्षण में वह पीछे हट गए।शरद पवार ने क्रिकेट के गेम से इसकी तुलना करते हुए कहा कि मैंने गुगली फेंकते हुए साल 2019 में सरकार बनाने के लिए बीजेपी के साथ चर्चा की थीम देवेंद्र फडणवीस ने विकेट दिखाई थी।अगर कोई गेंदबाज को विकेट दिखाएगा तो फिर वो बैट्समैन को कैसे छोड़ेगा। गुगली बॉल पर हमनें उनका विकेट उड़ा दिया।यह एक राजनीतिक गुगली थी।पवार ने कहा कि इन सब चीजों पर बात करने की जगह फडणवीस को महिला सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।जिसके बाद पवार के बयानों पर फडणवीस ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि राकांपा प्रमुख ने अंतत: “सच्चाई स्वीकार कर ली और आगे इस तरह के और भी खुलासे होंगे। पवार ने यहां तक कहा कि यह सच है कि भाजपा नेताओं ने राकांपा नेतृत्व से मुलाकात की थी और कई विषयों पर चर्चा की थी।पवार ने कहा लेकिन उन्होंने (फडणवीस ने) खुद ही कल ऐसा कहा कि मैंने दो दिन पहले (शपथ ग्रहण से) फैसला (भाजपा के गठबंधन करने का) बदल दिया… अगर मैंने फैसला बदल दिया था तो फिर आगे बढ़कर शपथ लेने का क्या कारण था? और वह भी इतनी सावधानी से सुबह।महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि अजीत पवार के साथ मिलकर जो सरकार महाराष्ट्र में साल 2019 में बनाई गई थी उसपर शरद पवार ने अपनी स्वीकृति दी थी।उनसे पहले बातचीत करने के बाद ही दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हुआ था।‘शरद पवार ने सरकार बनाने पर सहमति जताई थी लेकिन तीन-चार दिन बाद वो पीछे हट गए।सरकार बनाने की कोशिश शरद पवार से चर्चा के बाद शुरू हुई।उन्होंने दोहरा खेल खेला।इसके बाद अजीत पवार के पास हमारे पास आने के सिवाए कोई विकल्प ही नहीं बचा था, जिसके चलते हमनें शपथ ली।
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