
बॉम्बे लीक्स ,राजस्थान
राजस्थान और केंद्र की सियासत से दूरी बनाये रखने वाली राजस्थान भाजपा की फायर ब्रांड नेता के साथ पीएम मोदी का संवाद सियासी गलियारों में ज़ोर पकड़ चुका है।राजस्थान की चुनावी कमान अपने हाथ में लेने के बाद पीएम मोदी ने 8 अगस्त को प्रदेश के सांसदों को दिल्ली बुलाया था। मंगलवार को हुई इस मीटिंग में सबसे चौंकाने वाली बात थी वसुंधरा राजे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी।
दरअसल, वसुंधरा राजे के बिना राजस्थान भाजपा की सियासत की चर्चा अधूरी ही रहती है। खुद झालावाड़ से नौवीं से तेरहवीं लोकसभा तक सदस्य रहीं। उसके बाद से उनके पुत्र दुष्यंत सिंह लगातार चार बार से सांसद हैं। लगातार चार बार झालरापाटन और एक बार धोलपुर से विधायक रही हैं। दो बार मुख्यमंत्री रही हैं। केंद्र में मंत्री रही हैं। भाजपा की राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं और अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। ऐसी स्थिति में सांसदों की बैठक में वसुंधरा की मौजूदगी को लेकर राजस्थान की सियासत में गहमागहमी तेज हो चुकी हैं। वसुंधरा खेमे में यह उम्मीद बंध गई हैं कि पिछले साढ़े चार साल से लगभग निष्क्रिय रहीं वसुंधरा को विधानसभा चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, औपचारिक तौर पर कहा गया है कि प्रधानमंत्री जब भी सांसदों से मिलते हैं तो उस राज्य के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी बैठक में अवश्य शामिल होते हैं। इसी वजह से वसुंधरा राजे भी इस बैठक में शामिल हुई थीं।राजनीतिक जानकारों की माने तोराजस्थान के सांसदों के साथ खास मीटिंग में पीएम मोदी ने जो संवाद किया वो आगामी विधानसभा-लोकसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।पीएम मोदी ने इस मीटिंग में सांसद न होते हुए भी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ लेने के लिए बुलाया है।राजे राजस्थान की एक मात्र नेता है जो किसी लोकसभा क्षेत्र से पांच बार स्वयं सांसद रही हैं। वे केन्द्र में मंत्री रही हैं और दो बार प्रदेशाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री रही हैं।पांचवीं बार झालरापाटन से विधायक हैं। उनके संसदीय निर्वाचन क्षेत्र रहे झालावाड़-बारां से वर्तमान में उनके पुत्र दुष्यंत सिंह लगातार चौथी बार सांसद हैं।राजे को पिछले साढ़े चार साल से कोई विशेष भूमिका नहीं दी हुई थी, लेकिन राजस्थान के चुनावों की गणित और समीकरण जानने वाली वे सबसे अनुभवी नेता हैं।राजस्थान में जो समुदाय सबसे ज्यादा बड़े वोट बैंक हैं, उनमें भी राजे की पकड़ मानी जाती है। हाल ही स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी तंज कसते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री बनने लायक चेहरा तो केवल राजे का है, बाकी नेता अभी तक खुद को तैयार भी नहीं कर पाए हैं।
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