
बॉम्बे लीक्स ,दिल्ली
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सियासी पारी से सभी अवगत है।उनके लिए अंदाज़ा लगा पाना आसान नही तो मुश्किल भी नही।दिल्ली पहुँचे सीएम नीतीश ने भाजपा के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को याद करते हुए अटल जी के गुणगान किये।नीतीश दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी दिल्ली में मिले।हालांकि नीतीश के दिल्ली दौरे को लेकर माना जा रहा है 31 अगस्त को मुंबई में होने वाली विपक्षी एकता की तीसरी बैठक की रणनीति तैयारी को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार की यह कूटनीतिक और राजनीतिक मुलाकात है।
नीतीश के दिल्ली दौरे के बीच एक महत्वपूर्ण चीज देखने को मिली बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था दिखाते नजर आए हैं। चाहे वह पटना में रहे या दिल्ली में लेकिन उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में अब तक कोई कमी नहीं छोड़ी है। राजनीतिक या सैद्धांतिक मतभेद के बावजूद उन्होंने कभी भी अटल जी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री पर सवाल जरूर उठाए। आज वह दिल्ली में हैं। लेकिन इस दौरान भी उन्होंने बीजेपी के पूर्व प्रधानमंत्री और दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेई के प्रति पूर्ण आस्था प्रकट की। आज अटल बिहारी वाजपेई की पांचवी पुण्यतिथि थी। इस दौरान नीतीश कुमार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की पुण्यतिथि के मौके पर दिल्ली में उनके समाधि स्थल “सदैव अटल” गए। जहां उन्होंने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उनके घर पर मुलाकात की। आज अरविंद केजरीवाल का भी जन्मदिन है। नीतीश कुमार ने उन्हें भी बुके देकर शुभकामनाएं दीं।वहीं अरविंद केजरीवाल से नीतीश की मुलाकात को जदयू की तरफ से इस कूटनीतिक मुलाकात की कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई थी। फिलहाल इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से एक शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है। पार्टी की ओर से भी इसे शिष्टाचार और विपक्षी एकता की मजबूती के लिए की जा रही मुलाकात कहा जा रहा है। मगर नीतीश कुमार यदि कोई कदम उठाते हैं तो इसे राजनीतिक चश्मे से देखना लाज़मी हो जाता है। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हर कदम कूटनीतिक ही होता है। उनकी कूटनीति का नतीजा ही कहें कि वह बिहार के कुर्सी पर लगभग 18 साल से कब्जा जमाए हैं। सरकारें आईं, और गई सत्ता परिवर्तन भी हुए लेकिन सरकार चाहे जिसकी भी रहे सत्ता का केंद्र नीतीश ही रहे। दल भी आए और राजनीतिक चेहरे भी मगर नीतीश कुमार का कूटनीति के आगे सब फेल ही साबित हुए।फिलहाल आगामी 31 अगस्त और 1 सितंबर को मुंबई में I.N.D.I.A. गठबंधन की बैठक से पहले इन दोनों नेताओं की मुलाकात को राजनीतिक रणनीति के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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