Mumbai MBA Student Cyber Extortion – मुंबई में ऑनलाइन शिक्षा और परीक्षाओं से जुड़े साइबर धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए कर रहे 23 वर्षीय छात्र को फर्जी स्टूडेंट काउंसलर ने परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल का झूठा आरोप लगाकर 24.64 लाख रुपये की चपत लगा दी। जालसाज ने छात्र को उसका करियर बर्बाद करने, डिग्री रद्द कराने और राष्ट्रीय स्तर पर ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया। पीड़ित की शिकायत पर मुंबई पुलिस की साइबर विंग ने अज्ञात ठग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Mumbai MBA Student Cyber Extortion – ऑनलाइन परीक्षा के दौरान तकनीकी खराबी का जालसाज ने उठाया गलत फायदा
पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पीड़ित छात्र मुंबई के एक निजी विश्वविद्यालय से ऑनलाइन एमबीए प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहा था। हाल ही में आयोजित एक सेमेस्टर परीक्षा के दौरान तकनीकी खराबी की वजह से उसका वेबकैम कुछ मिनटों के लिए बंद हो गया था। परीक्षा समाप्त होने के कुछ दिनों बाद छात्र के पास खुद को विश्वविद्यालय का वरिष्ठ छात्र परामर्शदाता (Student Counsellor) बताने वाले एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉलर ने दावा किया कि परीक्षा निगरानी प्रणाली (Proctoring System) ने उसे नकल करते हुए पकड़ा है और विश्वविद्यालय प्रबंधन उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने जा रहा है।
Mumbai MBA Student Cyber Extortion – 35 किस्तों में ऐंठे 24.64 लाख रुपये, ‘क्लीयरेंस सर्टिफिकेट’ के नाम पर डराया
आरोपी ने छात्र को डराते हुए कहा कि यदि उसने मामला दबाने के लिए ‘पेनाल्टी और क्लीयरेंस फीस’ नहीं भरी, तो उसे अन्य सभी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा और उसके माता-पिता को भी सूचित किया जाएगा। बदनामी और करियर चौपट होने के खौफ में आकर छात्र ने आरोपी के दिए विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर करने शुरू कर दिए। शातिर ठग ने अलग-अलग औपचारिक प्रक्रियाओं, जांच शुल्क और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के बहाने करीब 35 बार में कुल 24.64 लाख रुपये की मोटी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली।
Mumbai MBA Student Cyber Extortion – विश्वविद्यालय से संपर्क करने पर खुली पोल, साइबर सेल ने शुरू की बैंक खातों की जांच
जब आरोपी की ओर से और अधिक पैसों की मांग की जाने लगी, तब संदेह होने पर छात्र ने विश्वविद्यालय के आधिकारिक परीक्षा विभाग से संपर्क किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी भी छात्र को फोन कर पैसे की मांग नहीं की गई है और न ही उस पर कोई नकल का मामला दर्ज है। धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़ित ने तुरंत साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनके जरिए ठगी की इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया था।
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