Bombay Leaks Desk
मुंबई:पत्रकार शाहिद अंसारी पर दर्ज हुए मामलों को लेकर मुंबई सेशन कोर्ट ने पुलिस को निर्देश जारी किया है कि मुईन मियां भ्रष्टाचार मामले में दर्ज हुई FIR में अंसारी द्वारा पुलिस जांच में सहयोग करने के लिए पुलिस को धारा 41 (A) का पालन करना होगा और इस मामले में पुलिस को सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए जारी किए गए निर्देषों का पालन करना पड़ेगा कोर्ट में अंसारी ने बताया कि मुईन मियां के ज़रिए जिस तरह से पुलिस पावर का दुरउपयोग किया गया है वह अत्यंत गंभीर है सुबूत के तौर पर उन्होंने स्टेशन डायरी की कॉपी भी कोर्ट में जमां की।जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया क्योंकि उस डायरी मे जो लिखा है उससे साबित हुआ कि मुईन मियां ने पुलिस पावर का दुरउपयोग कर शाहिद अंसारी के खिलाफ़ मामला दर्ज करवाया है।क्योंकि स्टेशन डायरी में ही लिखा है कि सेंट्रल रीज़न के एडिश्नल सीपी आर. डी. शिंदे के कहने पर मामला दर्ज किया गया है।
क्या है धारा 41 (A)
सेशन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए साल 2014 में अरनीश कुमार मामले का हवाला देते हुए यह निर्देष जारी किया है इस कानून में बिला वजह की गिरफ्तारी,और गिरफ्तारी के अंदेशे को लेकर कई सारी हिदायतें दी गई है।जिन मामलों में पुलिस के ज़रिए लगाई गई धाराओं में 7 साल से कम की सज़ा का प्रावाधान होता है उस में पुलिस किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर सकती।इस दौरान जिसके खिलाफ़ भी मामला दर्ज किया जात है उसे धारा 41 (A) के तहेत नोटिस दे कर जांच में सहयोग के लिए पुलिस थाने बुलाया जा सकता है सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अगर पुलिस को उस व्यक्ति को गिरफ्तार करना है पहले तो उसे संबंधित कोर्ट को पुख्ता सुबूत और वजह बतानी होगी।
क्या लिखा था स्टेशन डायरी में
स्टेशन डायरी में ही इस बात का खुलासा हुआ है कि शाहिद अंसारी के विरुद्ध जो मामला दर्ज किया गया है उसके पीछे एडिश्नल सीपी सेंट्रल रीजन आर.डी शिंदे का हाथ है।स्टेशन डायरी में मामला दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि उनके पास शिकायकर्ता ने आवेदन दिया था जिसके बाद उन्होंने उसका बयान दर्ज कर मामले की जांच करने की बात कही लेकिन उसी दौरान आर.डी शिंदे ने मामला दर्ज करने के लिए कहा जिसके बाद दबाव में आकर पुलिस अधिकारी ने यह मामला दर्ज किया खास बात तो यह है कि यह दबाव लिखित रूप में नहीं बल्कि मौखिक रूप से बनाया गया लेकिन स्टेशन डायरी में इसे लिख दिया गया जिसके बाद यह पता चला कि अंसारी के खिलाफ़ किस के कहने पर झूटा मामला दर्ज किया गया।
स्टेशन डायरी हाथ लगने के बाद पता चला कि जिस तरह से आनन फानन मामला दर्ज किया गया और उसमें वरिष्ठ अधिकारियों की जो भूमिका रही उसके पीछे की साज़िश क्या है वह जानने के बाद आपको हैरानी ज़रूर होगी लेकिन जो सच है वह जानना बेहद ज़रूरी है।क्योंकि अंसारी का शुमार उन उर्दू मीडिया के पत्रकारों में नही है जिन्होंने मुईन मियां के इशारों पर अंसारी के खिलाफ़ अभियान छेड़ रखा था लेकिन जैसे ही अंसारी के समर्थन में पूरी मीडिया और मीडिया यूनियन उतर आई तो उनके मुंह मे कालिख लग गई जिन्होंने अंसारी को विलन और मुईन मियां को हीरो बनाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी और अंसारी को झूटा साबित करने की नाकाम सुपारी ले रखी थी।दरअसल धड़ाधड़ अंसारी के पीछे FIR का लक्ष्य यह था कि मामला दर्ज होने के बाद अंसारी को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में अंसारी की हत्या कर दी जाए क्योंकि उस रात मोईन मियां के भक्तों की संख्या काफी ज्यादा थी जो रात में ही मामला दर्ज कर पुलिस की मदद से अंसारी को गिरफ्तार कर रात के अँधेरे में अंसारी का काम तमाम करने की प्लानिंग बना रहे थे क्योंकि मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग रहा इसी लिए जैसे ही मामला पुलिस थाने में दर्ज हुआ उसके बाद से ही नागपाड़ा पुलिस थाने के सीनियर पीआई और दूसरे अधिकारी और मुईन मियां के भक्त पूरी तरह से मुस्तइद शाहिद अंसारी को गिरफ्तार करने की बात ऐसे कर रहे थे जैसे शाहिद अंसारी आज़ाद मैदान दंगों का भगोड़ा आरोपी या अलकायदा का आतंकवादी हो।

सेंट्रल रीजन के एडिश्ननल सीपी आर.डी शिंदे और मुईन मियां
क्योंकि मुईन मियां द्वारा अंजुमन इस्लाम की एक हज़ार करोड़ की जिस जगह पर अपना कबज़ा साबित करने की नाकाम कोशिश की गई थी उस मामले की सच्चाई शाहिद अंसारी की खबर के बाद लोगों को पता चली जिसके सारे सुबूत मौजूद हैं।चूंकि मामला दर्ज होने के बाद उर्दू मीडिया के तथाकथिक पत्रकारों को छोड़कर पूरी पत्रकार युनियन ने जिस तरह से मामले को गंभीरता से लिया उसके बाद पुलिस हिरासत में अंसारी की हत्या करने वाली साजिश सफल नहीं हो पाई।मामला दर्ज करवाने के बाद मुईन मियां के भक्तों ने अंसारी का लगातार पीछा करते रहे धमकियां भी दिलवाईं इस बात की जानकारी अंसारी लगातार ज्वाइंट सीपी लॉ ऐंड ऑर्डर देवेन भारती को भी देते रहे लेकिन धमकियों का यह सिलसिला कम नहीं हुआ इसलिए अंसारी ने मुंबई पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री से दोबारा मिल कर मामले की सारी जानकारी देते हुए एक पत्र भी दिया जिसमें स्पष्ट लिखा था कि अगर किसी भी तरह से अंसारी को जानी या माली नुकसान पहुंचाया जाता है तो उसके जिम्मेदार मुईन मियां होंगे।इस मामले में मामला दर्ज करने के लिए मुईन मियां ने आर.डी शिदें जैसे वरिष्ठ और ईमानदार,फर्ज़शनास अधिकारी के कंधे और ओहदे का भरपूर इस्तेमाल किया।लेकिन स्टेशन डायरी में मौजूद तफ्सील ने इस राज़ को राज़ नहीं रहने दिया।
सेशन कोर्ट में अंसारी के वकील भावेश परमार ने कहा कि यह ऐसा कानून है जिसके बारे में लोग जागरुक ही नहीं है लोगों के जागरूक न होना से इसका फाएदा सीधे सीधे ऐसे लोग उठा लेते हैं जो पुलिस को कठपुतली के जैसे अपने इशारे पर नचाते हैं जिसका खमियाज़ा सीधे सीधे समाज में उन लोगों को भुगतना पड़ता है जो पुलिस और कोर्ट के चक्कर में न पड़ते हुए समाज का भला करने की कोशिश करते हैं उन भले लोगों में पत्रकार भी शामिल हैं।पुलिस अगर कानून का सही पालन करे तो यकीनन न्यायालय का बोझ हलका हो जाएगा।कई मामलों में बिला वजह की गिरफ्तारी के पीछे का मकसद ही यही होता है कि किस तरह से पुलिस को गुमराह कर उनका गलत इस्तेमाल किया जा सके।अंसारी के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है जिसके बाद सेशन कोर्ट ने पुलिस को इस कानून का पालन करने की हिदायत दी है।अंसारी के ऊपर दर्ज हुए झूटे मामले में जिस तरह पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका रही है उससे जाहिर होता है कि आने वाले वक्त में पत्रकारों के खिलाफ़ इस तरह की साजिशें न सिर्फ पुलिस विभाग के लिए बल्कि समाज के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है।इस लिए इस कानून के बारे में हर एक को जानना बेहद ज़रूरी है।
FIR खारिज करने का मामला मुंबई हाई कोर्ट में
अंसारी ने अपने ऊपर दर्ज हुई झूटी FIR को लेकर धारा 482 के तहेत FIR खारिज करने के लिए मुंबई हाई कोर्ट में दस्तक दी है जिसकी सुनवाई के दौरन न्यायलय को यह बात बताई तो हाई कोर्ट ने FIR खारिज करने की अर्जी पर सुनवाई जारी रखी लेकिन गिरफ्तारी के मामले को लेकर उन्होंने संबंधित कोर्ट में भी जाने का मश्विरा दिया क्यों नियम के अनुसार पहले ज़मानत के लिए निचली अदालत में जाना होता है। FIR खारिज करने को लेकर मुंबई हाई कोर्ट में एडोकेट राजेश पांचल ने कोर्ट को पूरे मामले की तफ्सील बताई और यह भी बताया कि किस तरह से पुलिस पावर का गलत इस्तेमाल कर पत्रकार शाहिद अंसारी के खिलाफ़ झूटा मामला दर्ज किया गया है इस मामले की सुनवाई जारी है हमें उम्मीद है कि कोर्ट से हमे न्याय मिलेगा।
अंसारी को पहले भी धमकाया गया था
साल 2013 में मुईन मियां के बहनोई मनाजिर हसन जो कि पेशे से डॉक्टर हैं उनके खिलाफ़ उत्तर प्रदेश में रेप केस दर्ज हुआ था पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर हवालात में भेज दिया था और उस दौरान मुईन मियां इस मामले में यूपी पहुंचे हुए थे और अंसारी को लखनऊ एयरपोर्ट पर मिले।मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद अंसारी ने पूरे मामले के बारे में पता किया और इसकी भनक मुईन मियां को लग गई मुईन मियां ने पहले अंसारी को फोन कर खबर न करने के लिए कहा और फिर उसके के बाद उनके भक्त आमिर इद्रीसी नाम के एक व्यक्ति ने अंसारी को फोन कर खबर न लिखने की धमकी दी थी और बाद में आसिम नाम के एक व्यक्ति से यह संदेश भेजा कि अगर मुईन मियां के बहनोई की रेप की खबर लिखी तो अंसारी की हत्या करवा दी जाएगी लेकिन यह खबर सामना सहित यूपी के कई हिन्दी अख्बार में छपी थी।अंसारी ने उस समय तत्कालीन ज्वाइंट सीपी क्राइम सदानंद दाते से शिकायत की थी जिसके बाद अंसारी का बयान इसी नागपाड़ा पुलिस थाने में दर्ज किया गया था लेकिन आजतक क्या कार्रवाई की गई पुलिस यह बताने में असमर्थ है।लेकिन अंसारी के खिलाफ़ दर्ज हुए झूटे मामले को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया पूरे मामले की जांच कर रही है जल्द ही इस बात का भी पता चल जाएगा कि अंसारी के खिलाफ़ साजिश रचने वालों मे और कौन कौन से लोग शामिल थे।
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