
शाहिद अंसारी
मुंबई:राज्य सराकर की गलती और लापरवाही की खमियाज़ा भुगतने वाले महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी संजय शिंत्रे ने राज्य सरकार की लापरवाही को लेकर CAT मे दस्तक दी है।संजय शिंत्रे फिलहाल दोंड में एसआरपीएफ कमांडेंट के ओहदे पर कार्यरत हैं।शिंत्रे के वकील एडोकेट राजेश पांटल ने बताया कि शिंत्रे आईपीएस पदवी के हकदार हैं लेकिन राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से शिंत्रे को पिछले दो साल से आईपीएस की पदवी से वंचित रखा गया।जिसको लेकर उन्होंने MAT में दस्तक देते हुए विभागी जांच को गैर कानूनी गैर कानूनी बताने की कोशिश की है कि साथ में आला अफ़सरो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अपील करते हुए 10 लाख हरजाना की मांग की है।इस केस की सुनवाई 25 नंबर को MAT में होगी ।
शिंत्रे का चयन 1996 में डी.वाई. एसपी के लिए किया गया उस वक्त 17 लोगों में से वह तीसरे नंबर पर थे नियम के अनुसार जो भी अधिकारी जिस बैच में सीनियर होता है उसी हिसाब से उसका रैंक आगे बढ़ाया जाता है।साल 2001 में सीनियरटी की जो लिस्ट 2008 में पब्लिश हुई उस लिस्ट में शिंत्रे का नंबर उनके रैंक के हिसाब से सही था।लेकिन साल 2014 में जो आईपीएस की सीनियरटी की लिस्ट पब्लिश की गई उस में कुल 30 पुलिस अधिकारियों के नाम थे शिंत्रे का नंबर 11 वें पर होना चाहिए था लेकिन इस 30 लोगों की लिस्ट में उनका नंबर 23 वें पर कर दिया गया यानी उनके 12 जूनियर अधिकारियों का बाद उनका नाम लिस्ट में लिखा गया।2014 में आईपीएस की पदवी के लिए राज्य भर से कुल 10 अधिकारियों का नाम का चयन होना था।जबकि उनकी जगह मनोज पाटिल का नाम लिखा दिया गया।मनोज पाटिल का 1996 की लिस्ट में 17 लोगों की लिस्ट में 4 था नंबर था।

मनोज पाटिल आईपीएस
सरकार द्वारा इस लापरवाही को लेकर शिंत्रे ने गलत तरीके से आईपीएस नामिनेशन को लेकर राज्य सराकर के खिलाफ़ MAT में दस्तक दी अपनी अर्ज़ी मे उन्होंने MAT को बताया कि किस तरह से उनका नंबर 11 से 23 पर किया गया और उनकी जगह मनोज पाटिल का नाम लिख दिया गया।इस शिकायत के बाद सराकर ने MAT को बताया कि राज्य सराकर ने आईपीएस सीनियरिटी की 2002-2003 की जो लिस्ट 2011 में पब्लिश की उस लिस्ट में ही उनका नंबर 12 जूनियरों के बाद लिखा गया है और जब तक वहां से इस गलती में सुधार नहीं होगा तब तक सरकार अपनी गलती को नहीं सुधार सकती।राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि चूंकि शिंत्रे ने सीनियरटी की 2002-2003 की जो लिस्ट 2011 में पब्लिश की गई उसे चुनौती नहीं दी इस लिए उनका केस खारिज कर दिया जाए।
शिंत्रे के वकील राजेश्वर पांचाल ने MAT मे कहा कि जब भी राज्य सरकार द्वारा आपीएस की किसी भी तरह की सीनियरटी की लिस्ट जारी होती है तो उसके पहले प्रोवेजिनल सीनियर लिस्ट सभी अफसरो को बांटी जाती है उसका मक़सद होता है कि अगर उस लिस्ट में कोई गलती हो तो सरकार को वह बताऐं ताकि उसमें सुधार किया जा सके।ठीक उसी तरह से फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद भी अगर उस में गलती हो गई या गलत तरीके से किसी भी अधिकारी का नाम ऊपर नीचे हुआ हो तो उस अफसर को उस पर अब्जेक्शन लेने का अवसर दिया जाता है।लेकिन शिंत्रे को आज तक सरकार ने न प्रोवीज़नल और न ही किसी तरह की फाइनल सीनियरटी लिस्ट मुहय्या कराई।
पांचाल ने कहा कि इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार के बड़े अधिकारी अपने चैंबर मे बैठ कर बंद कमरे में गलत तरीके से नामों की हेर फेर करते हैं।और इस हेर फेर के बारे में वह किसी अधिकारी को नही बताते नहीं तो उनका यह भांडा फूट जाएगा।वह अधिकारियों से इस तरह की अपेक्षा करते है कि बंद कमरे मे वह जो हेर फेर करेत हैं पुलिस अधिकारी उसे सपने में देखें और उसे कोर्ट में चुनौती दें जो कि संभव नहीं है।पांचल की इस दलील को MAT ने स्वीकार करते हुए शिंत्रे के मामले में सुनावाई करने का फैसला किया और सरकार को यह आदेश दिया कि शिंत्रे को आईपीएस की जो पदवी उन्हें नियमानुसार मिलनी चाहिए वह उन्हें दी जाए।
इस दौरान संजय शिंत्रे के जूनियर मनोज पाटिल आईपीएस बन चुके थे इसलिए शिंत्रे द्वारा MAT में केस जीतने के बावजूद CAT का दरवाजा खटखटाना पड़ा।CAT ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मनोज पाटिल को आईपीएस घोषित किए जाने वाली नोटिफिकेशन को देख कर ही इस केस में आने वाले आदेश के बारे में जो फैसला सुनाया जाएगा।
MAT का यह आदेश सरकार के लिए किसी ज़िल्लत से कम नहीं था क्योंकि इस में सरकार की उन अधिकारियों की गलती और लापरवाही या जान बूझ कर की गलती पूरी तरह से उजागर होते नज़र आई जिसके लिए उन्हें बड़ी जिल्लत और शर्मिंदगी उठानी पड़ी।राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी गलती सुधारने के बजाए।शिंत्रे के विरूद्ध एक ऐसे मामले को लेकर विभागी जांच कर चार्जशीट दाखिल करवाई गई जिस मामले में तत्कालीन गृह मंत्री आर.आर. पाटिल द्वारा क्लीन चिट देते हुए केस को बंद करने का आदेश दिया गया था।सरकार द्वारा अपनी गलती को छुपाने के लिए शिंत्रे के विरुद्ध इस मामले को उछाला गया जो सालों पहले बंद किया गया था।राज्य सराकर द्वारा गड़े मुर्दे को उखाड़ने का मतलब यह था कि उन्होंने जो गलती की उस पर पर्दा डालकर शिंत्रे का नाम लिस्ट में 12 जूनियर के बाद लिखने को लेकर अपनी हरकत को सही ठहराना क्योंकि यहां बदले की भावना के साथ गड़े मुर्दे को उखाड़ कर अपना कॉलर टाइट करने की कोशिश की गई।
शिंत्रे के वकील ने MAT में फिर से दस्तक देते हुए MAT में स विभागी जांच को ही गलत ठहराते हुए राज्य सरकार से 10 लाख के हरजाने की मांग की इस मामले कीसुनवाई कल MAT में होगी।अब लोगों की निगाहें कोर्ट पर टिकी हुई हैं।इस बारे में संजय शिंत्रे से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मेरे साथ अन्याय हुआ है और मुझे यकीन है कि MAT और CAT से मुझे न्याय मिलेगा।
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