शाहिद अंसारी
मुबंई:22 फरवरी 2016 को मुबंई सेशन कोर्ट के ज़रिए मुंबई के मुलंड पुलिस थाने को यह आदेश जारी किया गया कि एक डॉक्टर के खिलाफ़ रेप केस दर्ज करवाने के बाद उससे वसूली करने वाले चार लोगों के खिलाफ़ जिनके नाम बापू पंढरीनाथ गायकवाड़,इंद्रवा बापू गायकवाड़,शिलपा बापू गायकवाड़,सुनीता खरात हैं मामला दर्ज किया जाए।इस आदेश के बाद मुलुंड पुलिस थाने ने 4 मार्च को 4 आरोपियों को खिलाफ़ FIR दर्ज की लेकिन अबतक इस मामले मे पीड़िता का बयान दर्ज नहीं किया गया। कोर्ट के आदेश के बाद अपना बयान दर्ज करवाने के लिए पीड़िता ने मुलुंड पुलिस थाने के कई चक्कर काटे लेकिन पुलिस ने अबतक उनका बयान दर्ज नहीं किया।
पीड़िता सोनल कटारिया ने जब इस मामले मे जांच अधिकारी इंस्पेक्टर प्रदीप दुपटे से बात की तो उन्होंने कहा कि “कोर्ट FIR का ऑर्डर देता है ठीक है लेकिन कोर्ट के ऑर्डर की कोई अहमियत नहीं होती और ना ही इसमें हम वसूली करने वालों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई करेंगे और इसमें किसी को गिरफ्तार भी नहीं किया जाता”।जबकि FIR आई.पी.सी की धारा 385,387,506 (2),120(B) और 34 के तहेत दर्ज की गई है।
ध्यान रहे यह मामला साल 2014 का है जब मुलुंड के रहने वाले डॉक्टर कटारिया ने अपनी नौकरनी को काम से निकाला तो उसने मुलुंड पुलिस थाने के पुलिस वालों और एक गैंग के ज़रिए उनपर फ़र्जी रेप केस दर्ज करवाया था।रेप केस दर्ज करवाने के बाद ही इस गैंग ने डॉक्टर की पत्नि सोनल कटारिया से 20 लाख रूपए की लगातार मांग कर रहे थे।जिसके बाद सोनल कटारिया ने इस गैंग का स्टिंग ऑपरेशन करलिया और इसकी रिकॉर्डिंग स्थानी पुलिस थाने समेत ज़ोनल डीसीपी विनय राठौर को 7 बार सौंपी।चूंकि फ़र्ज़ी रेप केस गैंग के सदस्य मुलुंड पुलिस थाने के पुलिस कर्मी खुद थे इसका ज़िक्र खुद स्टिंग ऑपरेशन के दौरान उस गैंग ने किया था जिन्होंने फ़र्जी रेप केस दाखिल करवा कर पैसों की वसूली कर रहे थे।
इसी लिए शिकायत के बाद सोनल कटारिया को डीसीपी विनय राठौर और स्थानी पुलिस थाने से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली।जिसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया आखिर कोर्ट ने सुबूतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच के आदेश जारी करदिए।
कोर्ट के आदेश के 11 दिन बाद पुलिस ने FIR तो दर्ज की लकिन जब पीड़ित सोनल कटारिया ने अपना बयान देने के लिए पुलिस थाने गईं तो जांच अधिकारी ने पुलिस थाने चक्कर कटवाने शुरू किए और अबतक उनका बयान दर्ज नहीं किया गया।ताज्जुब इस बात का कि FIR दर्ज होने के बाद भी आरोपी अभी भी खुले आम धूम रहे और पुलिस कोर्ट के आदेशों के बाद खानापुरी करते नज़र रही है।इस बारे मे ंजब जांच अधिकारी इंस्पेक्टर प्रदीप दुपटे से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
इस बारे में पीड़ित के वकील समीर वैद्या ने कहा कि हम जल्द ही इस मामले मे मुबंई हाई कोर्ट में दस्तक देंगे और इस केस को किसी दूसरी एजेंसी से जांच करवाने की अपील करेंगे।क्योंकि जिस तरहसे इस केस में मुलुंड पुलिस थाने का रवय्या है उससे साफ ज़ाहिर होता है कि पुलिस कोर्ट के आदेशों के बाद भी अपनी लापरवाही और ढिटाई से बाज़ नहीं आएगी।इसलिए इस मामले की जांच किसी दूसरे एजेंसी से करवाई जाएगी तो ही न्याय मिल सकता है।
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