
शाहिद अंसारी
मुंबई :जनता से सीधा संवाद के लिये मुंबई पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने अपने कार्यकाल में जनता दरबार शुरू किया था।जिसके बाद जनता दरबार के तहत सत्यपाल सिंह समेत मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हर हफ्ते मुंबई के किसी ना किसी पुलिस थाने में जनता की शिकायतों को सुनने के लिए मौजूद रहते थे।जबकि तत्कालीन कमिश्नर सत्यपाल सिंह खुद हर हफ्ते मुंबई के किसी एक पुलिस थाने में शिकायतों को सुनने के लिए मौजूद रहते थे।
सत्यपाल सिंह और राकेश मारिया के जाने के बाद मौजूदा पुलिस कमिश्नर दत्ता फड़सलगीकर आज सुबह जनता से सीधा संवाद करने के लिए मालवणी पुलिस थाने पहुँचे जहां दरबार तो कामयाब रहा लेकिन विवादों में घिरा रहा।मालवणी इलाके में रहने वाले फिरोज़ अन्सारी जैसे कई लोगों ने मालवणी पुलिस स्टेशन के सीनियर पीआई मिलिन्द खेतले पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने जान पहचान वाले लोगों को और खबरियों व चमचों को बुलाया।जो शिकायत करने के बजाए वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक मिलिंद खेतले और कमिश्नर की तारीफ में क़सीदे पढ़ने लगे।
फिरोज़ का कहना है कि अगर सीपी साहब पुलिस थाने आते और इस बात की जानकारी उनको होती तो शायद वह भी अपनी शिकायत सीपी साहब से करते।लेकिन मालवणी पुलिस थाने के ज़रिए किसी को सूचित ना करने की वजह से केवल वही लोग पुलिस थाने पहुंचे जिन्हें एक प्लान के तहेत वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक ने बुलाया था।इस तरह से मुंबई पुलिस कमिश्नर दत्ता फड़सलगीकर का पहला जनता दरबार खबरियों और चमचों की वजह से विवादों में रहा।
वहीं इस जनता दरबार को लेकर सत्यापाल सिंह का कहना है कि जनता दरबार में जाने से पहले मुंबई पुलिस कमिश्नर को मीडिया और पुलिस की वेबसाइट के ज़रिए सार्वजनिक करना चाहिए।उसके अलावा पुलिस थाने के बाहर नोटिस बोर्ड पर लिखकर लोगों को जागरुक करना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस बात की जानकारी हो और वह बेझिझक अपनी समस्याओं को लेकर जनता दरबार मे पहुंचे।
लोगों को सूचित ना करने की पीछे की एक खास वजह यह भी होती है कि वरिष्ठ अधिकारियों तक बड़ी शिकायतें नीचे के अधिकारी पहुंचने नहीं देते लेकिन दरबार लगने की वजह से उन अधिकारियों में इस बात का डर पैदा होता है कि कहीं कमिश्नर के सामने की कोई उनकी शिकायत ना करदे इस लिए उन्हें ही बुलाया जाता है जो शिकायत नहीं बल्कि तारीफों के पुल बांधते हैं।वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक के ज़रिए अपने ही लोगों को बुलाने का मकसद यही होता है कि वह अपनी गलतियों को छुपाना चाहते हैं और मालवानी पुलिस निरिक्षक मिलिंद खेतले का मकसद भी कुछ ऐसा ही था इसलिए उन्होंने इलाके के एमएलए असलम शेख़ और चमचों को बुला लिया।हालांकि उनकी वहां कोई ज़रूरत ही नहीं थी।अब ऐसे में देखने वाली बात यह होगी की क्या अगला जनता दरबार लगने से पहले क्या मुंबई पुलिस कमिश्नर इन बातों का ख्याल रखेंगे कि जनता दरबार चमचों के लिए नहीं बल्कि आम जनता की समस्याओं के लिए है।
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