
नसीम पटेल
Bombay Leaks Desk
मुंबई:हाल ही में वक्फ़ बोर्ड की सीइओ नसीम बानों को राज्य सरकार ने 5000 करोड़ के घपले में शामिल होने की वजह से सस्पेंड कर दिया।शाहजाहां बादशाह की ओर से वक्फ़ की गई 55 एकड़ जगह को नसीम बानो पटेल समेत वक्फ़ मंत्री और वक्फ़ बोर्ड में शामिल अदना से आला ने सब ने बहती गंगा में हाथ धो लिया।मामला चूंकी यहीं नहीं थमा क्योंकि इस दौरान ED ने इस जगह से जुड़े कई मामलों को लेकर वक्फ़ के प्रापर्टी बेचने के गोरख धंधे में कई लोगों के नाम ज़ाहिर किए जिनमें नसीम खान और महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हिमांशू राय का भी नाम सामने आया।जिसको लेकर राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को लेकर जांच के आदेश जारी किए।
नसीम बानो के बाद अब आरिफ नसीम ख़ान का भी नंबर है क्योंकि ED के ज़रिए वक्फ की ज़मीन के सौदेबाजी को लेकर जो बात चीत की गई उसमें नसीम खान का भी नाम सामने आया है।इसलिए अब वह छटपटा रहे हैं और खुद को पाक साफ़ घोषित कर जांच की मांग कर रहे हैं नसीम खान की इस मांग से ऐसे ही लगता है जैसे कि बिल्ली से दूध पी जाने के बाद अफसोस जाहिर करे और दूध चोरी की जांच करने की बात करे।

नसीम खान
नसीम बानो पटेल द्वारा वक्फ़ में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर Bombay leaks ने ने काफ़ी पहले लिखा था विशेष रूप से अंजुमन इस्लाम की जगह जिस पर तथाकथित स्वंय घोषित धर्मधुरंधर श्री मुईन अशरफ़ उर्फ़ बंगाली बाबा ने जब अवैध रूप से क़ब्ज़ा किया था उस समय बंगाली बाबा ने जिन फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर छोटा सोनापुर कबरस्तान की जगह पर मौजूद मैदान पर क़ब्ज़ा कर लिया उस जगह पर कमेटी को लेकर हस्ताक्षर कर के उसकी अनुमती देने वाली कोई और नहीं बल्कि सय्याद एजाज़ हुसैन थे जिन्होंने 100 साल से भी ज्यादा समय से अंजुमन की मौजूद कलेक्ट्रेट लैंड पर वक्फ़ का कब्ज़ा साबित करने की कोशिश की लेकिन उस समय नसीम बानो पटेल ने इस पर रोक लगा दी थी।लेकिन रोक लगाने के बाद जब इस मामले की जांच शुरू हुई तो नसीम बानो ने आज तक वह जांच पूरी ही नहीं की थी क्योंकि यह सही वक्त थी नसीम बानो के लिए इस मामले में वह जमकर मलाई खाने का और बंगाली बाबा की बनाई गई कमेटी पर रोक लगी रही।
मामले में जब Bombay leaks ने कच्चा चिट्ठा खोला तो बंगाली बाबा और मुंबई के सेंट्रल रीज़न के एडिशनल कमिश्नर आर.डी.शिंदे ने मिलकर Bombay leaks सहयोगी शाहिद अंसारी के विरुद्ध झूटा मामला दर्ज कर मामले से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की लेकिन मुंबई हाईकोर्ट ने इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर को गलत करार दिया।
नासिक की ही वक्फ़ बोर्ड की जगह को लेकर वक्फ़ माफिया और अंडरवर्ल्ड कनेक्श ही बेनाकाब नहीं हुआ बल्कि वक्फ़ माफियाओं ने हर जगह इसी तरह से अंडरवर्ल्ड के ज़रिए मिलीभगत कर वक्फ़ और कलेक्ट्रेट की जगहों को हथिया लिया।कुछ ऐसा ही हुआ था जब छोटा सोनापुर मैदान के मामले को लेकर बंगाली बाबा को बेनाकाब किया गया था। Bombay leaks सहयोगी पर मामला दर्ज कराने के बाद बाबा बंगाली और उनके फंटरों द्वार एक मीटिंग रखी गई इस मीटिंग में 20 लोग शामिल थे जिसमें राजनेता,वकील और अंडरवर्ल्ड,बिल्डर सब लोग मौजूद थे।इस मीटिंग में जो लोग शामिल थे उनमें रफीक़ लकड़ावा,बिल्डर साबिर निर्मान काग्रेस एम.एल.एल अमीन पटेल भी शामिल थे।
इस मीटिंग का उद्देश्य था कि सुन्नी मुस्लिम छोटा कबरस्तान ट्रस्ट में मौजूद ट्रस्टियों को हटाकर श्री मुईन अशरफ़ उर्फ़ बंगाली बाबा अपना और अपने लोगों का नाम शामिल कर लें जबकि पहले ही इस पर वक्फ़ बोर्ड से रोक लगा दी गई थी।हालांकि मीटिंग में सर्वाविंग ट्रस्टी के ज़रिए अब्दुल कादर चोरवडवाला के ज़रिए हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन कमाल की बात तो यह है कि चोरवडवाला के ज़रिए पहले जो शिकायत की गई थी उसमें उन्होंने इन्हीं लोगो के खिलाफ़ शिकायत की थी जिसकी कॉपी Bombay leaks के पास मौजूद है।हालांकि हमने चोरवडवाला से उस मीटिंग के बारे में पूछा जिसमें बंगाली बाबा उनकी मौजूदगी की बात करते हैं लेकिन चोरवडवाला ने किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की और यह कर फोन रख दिया कि यह मामला न्यायलीन है इसलिए इस पर अभी कुछ भी कहना मुनासिब नहीं है।हालांकि चेंज रिपोर्ट फाइल करने का प्रावधान ही नहीं लागू होता क्योंकि इससे पहले वक्फ़ बोर्ड में बंगाली बाबा की ओर से जो कमेटी के लिए झूटे दस्तावेज़ जमा किए गए थे इस पर ही रोक लग गई है तो उसके बाद इस मामले में चेंज रिपोर्ट फाइल ही नहीं की जा सकती।
चूंकि बंगाली बाबा के समर्थक द्वरा मामला दर्ज कराए जाने के बाबा बंगाली बाबा की असलियत जग जाहिर हो गई थी इसलिए उन्होंने समझ लिया की मामला अब गंभीर है इसलिए चेंज रिपोर्ट फाइल करने की प्लानिगं बनाई गई और 14 सितंबर 2016 को वक्फ़ बोर्ड में जमां की गई है।चूंकि नसीम बानों ने पहले तो रोक लगाई थी लेकिन जिस तरह मामले पर निर्णय देने में देरी लगाई उससे पता चलता है कि वह इस मामले को लेकर पहले तो गंभीर थीं लेकिन बाद में वह खुद इस मामले को खींचती रही आलम यह रहा कि लंबा समय बीत जाने के बाद भी वक्फ़ बोर्ड ने अपना फैसला नहीं सुनाया।जबकि वक्फ़ बोर्ड में ऐसे कई मामले हैं जहां खुद नसीम बानो ने मलाई खाने के चक्कर में रातों रात कई मामलों कगी फाइलें गायब करवा दी और कई मामलों के फैसले भी सुना कर उनका निपटारा भी कर दिया।जबिक ऐसे हज़ारों मामलों की फाइलें वक्फ़ बोर्ड की फाइलें धूल चाट रही हैं और लोग उन पर फैसले का इंतेज़ार कर रहे हैं।अब ऐसे में लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं कि राज्य सरकार ने नसीम बानो पटेल पर कार्रवाई का बिगुल बजा दिया है तो अब वक्फ़ माफियाओँ की फहरिस्त में शामिल नसीम खान के भी दिन भरने वाले हैं और जल्द ही इनका कच्चा चट्ठा खुलने वाला है।
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