Maharashtra Girl Students Pocket Money Scheme – महाराष्ट्र सरकार राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहीं छात्राओं को आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना पर विचार कर रही है। राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे इस प्रस्ताव के तहत कॉलेज जाने वाली छात्राओं को हर महीने 2,000 रुपये का ‘पॉकेट मनी’ या मानदेय दिया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य छात्राओं को दैनिक शैक्षणिक खर्च, किताबों और यात्रा खर्च के लिए सक्षम बनाना है ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी छात्रा की पढ़ाई न छूटे।
Maharashtra Girl Students Pocket Money Scheme – ‘कमवा आणि शिका’ योजना की तर्ज पर तैयार किया जा रहा खाका
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील के अनुसार, इस योजना को ‘कमवा आणि शिका’ (Earn and Learn) की अवधारणा पर लागू करने की योजना है। इस पहल के तहत विश्वविद्यालयों और बड़े महाविद्यालयों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से छात्राओं को कॉलेज परिसरों में ही अंशकालिक (पार्ट-टाइम) कार्य और कौशल विकास के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिसके एवज में 2,000 रुपये की मासिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
Maharashtra Girl Students Pocket Money Scheme – सीएसआर फंड और विश्वविद्यालयों की मदद से जुटाया जाएगा बजट
राज्य सरकार इस योजना के वित्तीय प्रबंधन के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर मॉडल तैयार कर रही है। इससे पहले राज्य सरकार ने कई व्यावसायिक व तकनीकी पाठ्यक्रमों में बालिकाओं के लिए शिक्षण शुल्क में छूट और अन्य भत्तों की व्यवस्था की है। नई पॉकेट मनी योजना से ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाली छात्राओं को बिना किसी वित्तीय तनाव के अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
Maharashtra Girl Students Pocket Money Scheme – योजना के स्वरूप को लेकर राजनीतिक हलकों में शुरू हुई बहस
सरकार के इस संभावित कदम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाएं और बहस भी शुरू हो गई हैं। जहां सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण, उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट दर घटाने और युवतियों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी खेमे से इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि केवल नकद राशि देने के बजाय बुनियादी शैक्षणिक ढांचे, कॉलेजों की गुणवत्ता और रोजगारपरक शिक्षा पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
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