Mumbai OC Crisis: मुंबई में हजारों इमारतों के पास आज भी ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) नहीं है, जिससे उनमें रहने वाले फ्लैट मालिकों और हाउसिंग सोसायटियों को कानूनी तथा आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अनौपचारिक अनुमानों के अनुसार, शहर की करीब 19,000 इमारतें बिना OC के हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सितंबर 2026 में विशेष एमनेस्टी स्कीम शुरू की थी, लेकिन इसे अब तक बेहद सीमित प्रतिक्रिया मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, योजना के तहत सिर्फ एक या दो आवेदन आने की जानकारी सामने आई है। आवेदन प्रक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी, जटिल शर्तें और नियमितीकरण का भारी खर्च इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। अब इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और टाउन प्लानर्स के संगठन PEATA India ने नागरिकों को योजना की जानकारी देने के लिए विशेष सेमिनार आयोजित करने का फैसला किया है।
मुंबई में हजारों इमारतें बिना OC, BMC की योजना में सिर्फ एक-दो आवेदन
Mumbai OC Crisis: मुंबई में ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के बिना बनी या आबाद इमारतों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई हाउसिंग सोसायटियां ऐसी हैं, जहां लोग वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन उनकी इमारतों को अब तक संबंधित प्राधिकरण से अंतिम ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है।
प्रैक्टिसिंग इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट्स एंड टाउन प्लानर्स एसोसिएशन (PEATA India) के अध्यक्ष योमेश राव के अनुसार, मुंबई में बिना OC वाली इमारतों की अनौपचारिक अनुमानित संख्या करीब 19,000 है।
इसके अतिरिक्त MHADA और झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) से संबंधित लगभग 6,000 इमारतों का भी उल्लेख किया गया है। इस प्रकार विभिन्न श्रेणियों को शामिल करने पर यह संख्या करीब 25,000 तक पहुंच सकती है।
हालांकि, BMC के अपेक्षाकृत सीमित अनुमानों में बिना OC वाली इमारतों की संख्या कम से कम 4,500 बताई गई है। इसलिए 19,000 या 25,000 के आंकड़ों को आधिकारिक रूप से सत्यापित कुल संख्या नहीं माना जा सकता।
इस समस्या को दूर करने के लिए BMC ने 8 सितंबर 2026 से OC एमनेस्टी स्कीम लागू की थी। इसके तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली हाउसिंग सोसायटियां, जमीन मालिक, बिल्डर और व्यक्तिगत फ्लैट मालिक आवेदन कर सकते हैं।
योजना में शुरुआती छह महीनों के दौरान कुछ वित्तीय रियायतों का भी प्रावधान रखा गया है।
इसके बावजूद PEATA India के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद अब तक सिर्फ एक या दो आवेदन ही प्राप्त होने की जानकारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में फ्लैट मालिकों को यह पता ही नहीं है कि योजना का लाभ कौन ले सकता है, आवश्यक दस्तावेज क्या हैं और आवेदन किस तरीके से जमा करना होगा।
OC लेने के लिए ₹10 से ₹20 लाख तक खर्च का खतरा, बिल्डरों की गलतियों की कीमत क्यों चुकाएं फ्लैट मालिक?
Mumbai OC Crisis: BMC की एमनेस्टी स्कीम को लेकर हाउसिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कई व्यावहारिक सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र सोसायटीज वेलफेयर एसोसिएशन (MahaSEWA) के संस्थापक अध्यक्ष सीए रमेश प्रभु के मुताबिक, मौजूदा योजना में कुछ ऐसी शर्तें हैं जिनका पालन करना पुरानी इमारतों और व्यक्तिगत फ्लैट मालिकों के लिए मुश्किल हो सकता है।
योजना के अनुसार, पात्र आवासीय इकाइयों का कारपेट एरिया सामान्यतः 80 वर्ग मीटर यानी लगभग 861 वर्ग फुट तक होना चाहिए। इसके अतिरिक्त नियमितीकरण की अनुमति निर्धारित सीमा के भीतर ही मिल सकती है।
आवेदन के लिए वैध स्वामित्व दस्तावेज, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, आवश्यक अग्निसुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य मंजूरियों की जरूरत पड़ सकती है।
जिन इमारतों में स्वीकृत निर्माण योजना से अधिक निर्माण हुआ है, वहां अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) खरीदने का खर्च भी सामने आ सकता है।
रमेश प्रभु के अनुसार, कुछ मामलों में यह खर्च व्यक्तिगत फ्लैट मालिकों के लिए ₹10 लाख से ₹20 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह सभी इमारतों पर लागू होने वाला निश्चित शुल्क नहीं है। वास्तविक खर्च संबंधित इमारत की स्थिति और नियमों के आधार पर अलग-अलग होगा।
विशेषज्ञों का सवाल है कि यदि किसी बिल्डर ने निर्माण के दौरान नियमों का उल्लंघन किया या आवश्यक मंजूरियां पूरी नहीं कीं, तो उसका आर्थिक बोझ बाद में फ्लैट खरीदने वाले नागरिकों पर क्यों डाला जाए?
महाराष्ट्र राज्य सहकारी गृहनिर्माण महासंघ से जुड़े अधिवक्ता श्रीप्रसाद परब ने भी इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया है।
उनके अनुसार, कई मामलों में बिल्डर स्वीकृत योजना से अलग निर्माण कर देते हैं, जिससे इमारत को OC नहीं मिल पाता। इसके बाद फ्लैट मालिकों को अतिरिक्त जल शुल्क, संपत्ति से जुड़े खर्च और पुनर्विकास के दौरान कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने BMC से आवेदन की प्रक्रिया सरल बनाने और नियमितीकरण के शुल्क में अधिक राहत देने की मांग की है।
3 नवंबर को दादर में विशेष सेमिनार, जानें कौन ले सकता है OC एमनेस्टी स्कीम का लाभ
BMC की योजना के बारे में नागरिकों को जानकारी देने के उद्देश्य से PEATA India ने 3 नवंबर 2026 को मुंबई के दादर में एक विशेष सेमिनार आयोजित किया है।
इस कार्यक्रम में हाउसिंग सोसायटियों, फ्लैट मालिकों, आर्किटेक्ट्स, इंजीनियरों और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों को OC एमनेस्टी स्कीम की शर्तों तथा आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
यह सेमिनार शाम 5 बजे से दादर पूर्व स्थित योगी सभागृह में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इसमें भाग लेने के लिए कोई शुल्क नहीं रखा गया है।
योजना के तहत मुख्य रूप से ऐसी आवासीय इमारतें पात्र हो सकती हैं जो 17 नवंबर 2016 से पहले आबाद थीं, जिनके पास आवश्यक निर्माण मंजूरियां थीं, लेकिन अंतिम OC नहीं मिला।
कुछ शर्तों के तहत स्कूलों और अस्पतालों की इमारतों को भी योजना में शामिल किया गया है।
आवेदन के लिए स्वीकृत निर्माण योजना, इंटिमेशन ऑफ डिसअप्रूवल (IOD), कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (CC), स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने होते हैं।
आवेदन की प्रक्रिया BMC के ऑनलाइन AutoDCR पोर्टल के माध्यम से निर्धारित की गई है। हालांकि, अक्टूबर की शुरुआत में पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
विशेषज्ञों ने आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया है।
अधिवक्ता श्रीप्रसाद परब ने इमारतों की स्थिति के आधार पर ग्रीन, एम्बर और रेड जैसी तीन श्रेणियों वाली डिजिटल निगरानी व्यवस्था की भी वकालत की है।
इस व्यवस्था में नियमों का पालन करने वाली इमारतों, छोटी अनियमितताओं वाली इमारतों और गंभीर उल्लंघन वाली इमारतों की अलग-अलग पहचान की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में अनधिकृत निर्माण की पहचान शुरुआती चरण में ही संभव हो सकती है।
ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट किसी इमारत के स्वीकृत निर्माण प्लान और संबंधित नियमों के अनुरूप तैयार होने की महत्वपूर्ण प्रशासनिक मंजूरी है।
OC नहीं होने से संपत्ति की बिक्री, पुनर्विकास, आवश्यक नागरिक मंजूरियों और कुछ वित्तीय लेनदेन में दिक्कतें हो सकती हैं। हालांकि, केवल OC नहीं होने का अर्थ यह नहीं कि उस फ्लैट की रजिस्ट्री अपने आप अमान्य हो जाती है।
मुंबई में हजारों इमारतों को इस समस्या से राहत दिलाने के लिए BMC की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन इसके प्रभावी होने के लिए नागरिकों तक सही जानकारी पहुंचाना, आवेदन प्रक्रिया आसान बनाना और नियमितीकरण के खर्च से जुड़े सवालों का समाधान करना आवश्यक होगा।
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