BMC Hospital – बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा मुंबई के उपनगरीय क्षेत्रों में स्थित छह प्रमुख नागरिक अस्पतालों के संचालन, प्रबंधन और रख-रखाव को 30 साल के दीर्घकालिक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी संस्थाओं को सौंपने के फैसले ने राज्य की राजनीति और नागरिक हलकों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। नगर निगम प्रशासन ने इन अस्पतालों को चलाने के लिए निजी बोलीदाताओं से औपचारिक टेंडर आमंत्रित किए हैं। इस कदम का विपक्षी दलों, पूर्व पार्षदों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं (Public Health Activists) द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। आलोचकों का आरोप है कि 52,000 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट वाली देश की सबसे अमीर महानगर पालिका बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं खुद संचालित करने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर सार्वजनिक अस्पतालों का गुपचुप ‘निजीकरण’ (Privatisation) कर रही है।
BMC Hospital – मानखुर्द, गोवंडी और भांडुप जैसे स्लम पॉकेट्स में स्थित हैं अस्पताल; गरीबों की लाइफलाइन पर असर
जिन छह अस्पतालों को पीपीपी मॉडल के तहत निजी हाथों में देने की योजना बनाई गई है, उनमें मानखुर्द स्थित लल्लूभाई कंपाउंड अस्पताल, भांडुप और पूर्वी उपनगरों के अन्य नए निर्मित व अपग्रेड किए गए स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। ये सभी अस्पताल घनी आबादी वाले स्लम और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के रिहायशी इलाकों में स्थित हैं, जहां के लाखों दैनिक मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी छोटी-बड़ी बीमारियों के किफायती व मुफ्त इलाज के लिए पूरी तरह नगर निगम के अस्पतालों पर निर्भर हैं। नागरिक संगठनों का कहना है कि जहां इन क्षेत्रों में बीएमसी को अपने स्तर पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और आधुनिक डायग्नोस्टिक लैब तैनात कर स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करना चाहिए था, वहीं निजी कंपनियों को 30 साल के लिए लीज पर अस्पताल सौंपना जनता के विश्वास के साथ सीधा धोखा है।
BMC Hospital – सुपर-स्पेशियलिटी और ओपीडी शुल्कों में भारी इजाफे की आशंका; निजी मुनाफे पर उठे सवाल
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और नागरिक अधिकार संगठनों ने टेंडर की शर्तों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि बीएमसी का दावा है कि बुनियादी ओपीडी शुल्क नगर निगम की दरों पर ही रहेगा, लेकिन विशेष ओपीडी (Specialty OPD) और सुपर-स्पेशियलिटी परामर्श, सर्जरी व उन्नत जांचों के लिए तय किए गए शुल्क निजी स्तर के होंगे। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि निजी ऑपरेटर अंततः मुनाफे के लिए काम करेंगे, जिससे ठेके पर रखे गए डॉक्टरों की कोई सीधी जवाबदेही तय नहीं होगी और आईसीयू व क्रिटिकल केयर में गरीबों के लिए बेड मिलना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इससे पहले भी गोवंडी और मानखुर्द में सैकड़ों नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर बीएमसी के इस निजीकरण प्रयास के खिलाफ विशाल विरोध मार्च निकाला था।
BMC Hospital – बीएमसी का ‘बेहतर विशेषज्ञता’ का तर्क; विपक्षी दलों ने टेंडर तुरंत रद्द करने की दी चेतावनी
दूसरी तरफ, बीएमसी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का निर्माण नगर निगम ने किया है, लेकिन सुपर-स्पेशियलिटी डॉक्टरों की भारी कमी और तकनीकी विशेषज्ञता के अभाव को दूर करने के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया गया है ताकि आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं तेजी से शुरू हो सकें। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि निर्वाचित नगरसेवकों के कार्यकाल की गैर-मौजूदगी और प्रशासक के राज में इतना बड़ा नीतिगत फैसला लेना असंवैधानिक है। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 30 साल के पीपीपी टेंडर को तुरंत रद्द नहीं किया गया, तो वे इस मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे और सड़कों पर तीव्र आंदोलन छेड़ेंगे।
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