GE Aerospace Double India Supplier – वैश्विक विमानन क्षेत्र की प्रमुख दिग्गज कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) ने भारत में अपने दीर्घकालिक विस्तार की ऐतिहासिक योजना का अनावरण किया है। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह 2025 से 2030 के बीच भारतीय सप्लायर्स पर किए जाने वाले अपने सालाना खर्च को करीब दोगुना करके लगभग 3,320 करोड़ रुपये (लगभग 40 करोड़ डॉलर) करेगी। नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया टेकिंग फ्लाइट’ शिखर सम्मेलन में अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की व्यापक रिपोर्ट ‘पावरिंग प्रोग्रेस’ जारी करते हुए कंपनी ने यह जानकारी दी। भारत के तेजी से बढ़ते घरेलू एविएशन बाजार, रिकॉर्ड विमान ऑर्डरों और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को मजबूती देने के लिए यह कदम बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
GE Aerospace Double India Supplier – भारतीय एयरलाइंस के पास 1,400 से ज्यादा जीई इंजन; 3.7 लाख नौकरियों को सीधा सहारा
ईवाई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उड़ान भरने वाले अधिकांश वाणिज्यिक विमान जीई और उसकी सहयोगी कंपनियों के इंजनों पर निर्भर हैं। दिसंबर 2025 तक देश में 1,400 से अधिक जीई इंजन सक्रिय सेवा में थे, जिन्होंने भारतीय एयरलाइंस को 88.2 प्रतिशत का दुनिया में सबसे अधिक पैसेंजर लोड फैक्टर हासिल करने में मदद की। इस पूरे विमानन इकोसिस्टम से देश में लगभग 3,70,000 प्रत्यक्ष नौकरियां संचालित हो रही हैं। वित्त वर्ष 2026 में भारतीय एयरलाइंस का राजस्व करीब 1.58 लाख करोड़ रुपये रहा। भविष्य में यात्रियों की संख्या 2040 तक 1.1 अरब पहुंचने का अनुमान है, जिसके लिए भारत और दक्षिण एशिया को अगले दो दशकों में 6,600 से अधिक नए इंजनों की जरूरत होगी।
GE Aerospace Double India Supplier – पुणे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का विस्तार; 17 घरेलू सप्लायर्स और कुशल वर्कफोर्स की नई पौध
जीई एयरोस्पेस के दक्षिण एशिया सीईओ विक्रम राय ने स्पष्ट किया कि कंपनी का उद्देश्य सिर्फ इंजन बेचना नहीं, बल्कि घरेलू विनिर्माण श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाना है। कंपनी के पुणे स्थित प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 2024 से अब तक ऑटोमेशन और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के लिए करीब 457 करोड़ रुपये का नया निवेश किया जा चुका है। आज कंपनी का नेटवर्क देश के 17 बड़े और मध्यम औद्योगिक सप्लायर्स के साथ जुड़ा हुआ है, जिस पर 2025 में 1,660 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और इसे 2030 तक 3,320 करोड़ तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा, पुणे फैसिलिटी से 2015 से अब तक 5,000 से अधिक अप्रेंटिस कुशल तकनीशियन बनकर तैयार हो चुके हैं।
GE Aerospace Double India Supplier – बेंगलुरु आरएंडडी सेंटर में 1,000 पेटेंट; तेजस लड़ाकू विमानों और नौसेना को मिल रही ताकत
वाणिज्यिक विमानन के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भी जीई की हिस्सेदारी काफी गहरी है। बेंगलुरु स्थित टेक्नोलॉजी सेंटर ने अब तक 1,000 से अधिक एविएशन पेटेंट हासिल किए हैं और यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली जीई9एक्स (GE9X) इंजन के डिजाइन में शामिल रहा है। रक्षा मोर्चे पर, कंपनी 1986 से एचएएल के साथ मिलकर भारतीय नौसेना के एलएम2500 इंजनों और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1 के F404 इंजनों की आपूर्ति कर रही है। वहीं तेजस एमके-2 के लिए F414 इंजनों का भारत में संयुक्त निर्माण और अपाचे हेलीकॉप्टरों के इंजनों की मेंटेनेंस साझेदारी रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में गेमचेंजर साबित हो रही है।
(46533)