Subhash Chandra NCLT Settlement – नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा जी समूह के संस्थापक और मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के 22,006.57 करोड़ रुपये के कुल बकाए को केवल 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान में निपटाने (Personal Insolvency Resolution) की योजना को मंजूरी देने के बाद देश में बड़ा सियासी और आर्थिक विवाद छिड़ गया है। कर्जदाताओं को करीब 99.97 फीसदी के भारी नुकसान (Haircut) के साथ मिली इस राहत पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिवाला कानून पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि यह केवल वित्तीय ‘हेयरकट’ नहीं, बल्कि ‘मुंडन’ है, जिसने 2016 के इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) का पूरी तरह मखौल बनाकर रख दिया है।
Subhash Chandra NCLT Settlement – तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा ने दी 6.5 करोड़ के पुनर्भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी
एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ में इस मामले पर मतभेद होने और खंडित फैसला (Split Verdict) आने के बाद ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष ने तीसरे सदस्य के रूप में न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा को नियुक्त किया था। तीसरे सदस्य ने आईबीसी की धारा 114 के तहत सुभाष चंद्रा के 6.5 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान को हरी झंडी दे दी। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LICHFL) समेत असहमति जताने वाले कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव को ‘अव्यावहारिक और गैरकानूनी’ बताते हुए विरोध किया था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का 1,322.39 करोड़ रुपये का दावा था, जिसके बदले उसे मात्र 38 लाख रुपये (दावे का केवल 0.028%) मिल रहे थे। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने माना कि 80.81% वोटिंग शेयर वाले लेनदारों ने इस प्लान का समर्थन किया है, इसलिए इसे खारिज नहीं किया जा सकता।
Subhash Chandra NCLT Settlement – जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना, आईबीसी की साख पर उठाए सवाल
फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा कि वित्त की दुनिया में जब कर्जदार से मूल राशि का केवल एक छोटा हिस्सा ही वापस मिल पाता है, तो उस नुकसान के अंतर को ‘हेयरकट’ कहा जाता है। लेकिन 22,006 करोड़ रुपये से अधिक के दावों के मुकाबले सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये वसूल होने देना किसी हेयरकट से परे देश की बैंकिंग प्रणाली का मुंडन कर देने जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिक या किसान छोटा सा कर्ज नहीं चुका पाते तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाती है, जबकि बड़े कॉर्पोरेट उद्योगपतियों के हजारों करोड़ के कर्ज इस तरह नाममात्र की रकम में सेटल कर दिए जाते हैं।
Subhash Chandra NCLT Settlement – ट्रिब्यूनल ने दी दलील, व्यक्तिगत दिवालियापन टलने से मुख्य देनदारों से रिकवरी की उम्मीद
अपने 144 पन्नों के विस्तृत आदेश में एनसीएलटी ने स्पष्ट किया कि रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) द्वारा कराए गए मूल्यांकन के अनुसार सुभाष चंद्रा की घोषित व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य समझौते के तहत दी जा रही राशि से भी कम था। ट्रिब्यूनल ने तर्क दिया कि यदि इस प्लान को खारिज कर दिया जाता और चंद्रा को दिवालिया घोषित किया जाता, तो कर्जदाताओं को इससे भी कम रकम मिलती। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस व्यक्तिगत समाधान के बाद कारोबारी के दोबारा सक्रिय होने पर लेनदारों को मुख्य कॉर्पोरेट देनदार कंपनियों (Principal Debtors) से अपना बाकी बकाया वसूलने का बेहतर मौका मिल सकेगा।
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