Mumbai Landslide Hotspots Survey – मुंबई और उसके उपनगरीय इलाकों में मानसूनी बारिश के दौरान होने वाले भूस्खलन के खतरों को लेकर किए गए एक व्यापक तकनीकी सर्वेक्षण में शहर के 32 संवेदनशील लैंडस्लाइड हॉटस्पॉट (Landslide Hotspots) चिन्हित किए गए हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, कई सुरक्षात्मक उपायों के दावों के बावजूद इनमें से अधिकांश पहाड़ी इलाके अब भी उच्च जोखिम (High Risk) के दायरे में बने हुए हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC), म्हाडा (MHADA) और भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों द्वारा किए गए इस मुआयने के बाद प्रशासन ने प्रभावित बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
Mumbai Landslide Hotspots Survey – घाटकोपर, भांडुप, कुर्ला और मलाड की पहाड़ियां सबसे अधिक संवेदनशील
सर्वेक्षण में पाया गया कि पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों की घनी आबादी वाली पहाड़ी बस्तियां भारी बारिश के दौरान मिट्टी धंसने और चट्टानें खिसकने के प्रति सबसे अधिक असुरक्षित हैं। घाटकोपर के असल्फा विलेज व भटवाड़ी, भांडुप, कुर्ला, विक्रोली के सूर्यानगर, गोवंडी, कांदिवली और मलाड के कुरार विलेज जैसे क्षेत्रों को ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लगातार होने वाली मूसलाधार बारिश से पहाड़ी ढलानों की मिट्टी ढीली पड़ जाती है, जिससे अचानक बड़े भूस्खलन की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
Mumbai Landslide Hotspots Survey – रिटेनिंग वॉल का अभाव और अवैध निर्माण बने खतरे की मुख्य वजह
तकनीकी विशेषज्ञों ने रिपोर्ट में रेखांकित किया है कि अधिकांश चिन्हित स्थलों पर सुरक्षात्मक रिटेनिंग वॉल (Retaining Wall) या तो मौजूद नहीं हैं या फिर पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। इसके अलावा प्राकृतिक जल निकासी (Drainage Channels) का अवरुद्ध होना, सीवेज का अनियंत्रित बहाव और खड़ी ढलानों पर बिना किसी तकनीकी योजना के किए गए अनधिकृत निर्माण मिट्टी के कटाव को बढ़ावा दे रहे हैं। कई स्थानों पर सुरक्षा दीवार निर्माण के प्रस्ताव विभिन्न एजेंसियों के बीच भूमि स्वामित्व और समन्वय की कमी के चलते लंबित पड़े हैं।
Mumbai Landslide Hotspots Survey – बीएमसी ने जारी किए खाली करने के नोटिस, आपदा प्रबंधन दल अलर्ट
संभावित जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए नगर निगम के संबंधित वार्ड अधिकारियों ने खतरनाक ढलानों पर रह रहे परिवारों को अग्रिम नोटिस जारी कर सुरक्षित स्थानों या अस्थायी आश्रय शिविरों में जाने की अपील की है। इसके साथ ही नगर निगम ने अपने आपातकालीन नियंत्रण कक्ष और एनडीआरएफ (NDRF) के साथ समन्वय स्थापित करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखने और भारी बारिश की चेतावनी के दौरान त्वरित बचाव कार्य शुरू करने के लिए विशेष रेस्क्यू टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।
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