Mumbai BMC Contractor Suicide – महाराष्ट्र में सरकारी विभागों और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा विकास कार्यों के बिलों का समय पर भुगतान न किए जाने का बेहद खौफनाक और दुखद परिणाम सामने आया है। नवी मुंबई निवासी सरकारी ठेकेदार गजानन देवकाते ने बीएमसी में करीब 2 करोड़ रुपये के बिल बकाया रहने और भारी आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। समय पर काम पूरा करने के बावजूद प्रशासनिक लापरवाही और बिल पास कराने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने से वे गंभीर मानसिक व वित्तीय दबाव में थे।
Mumbai BMC Contractor Suicide – कार्यपालन अभियंता को लिखा था पत्र, बयां किया था दर्द
जानकारी के अनुसार, गजानन देवकाते ने बीएमसी के अंतर्गत विभिन्न बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया था। लगभग एक साल पहले उन्होंने संबंधित विभाग के कार्यपालन अभियंता (Executive Engineer) को एक विस्तृत पत्र लिखकर अपनी व्यथा व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि समय पर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करने के बावजूद ठेकेदारों को अपने ही बिलों का भुगतान पाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के 10-10 चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई महीनों के लगातार प्रयासों के बाद भी जब उन्हें ₹2 करोड़ का भुगतान नहीं मिला, तो वे कर्ज और आर्थिक संकट के दलदल में फंसते चले गए।
Mumbai BMC Contractor Suicide – आजाद मैदान में ठेकेदारों का आंदोलन, 86 हजार करोड़ के बिल बकाया होने का दावा
गजानन देवकाते की आत्महत्या की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब महाराष्ट्र के हजारों सरकारी ठेकेदार मुंबई के आजाद मैदान में बकाया बिलों के भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। कंत्राटदार महासंघ का दावा है कि राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के पास ठेकेदारों के लगभग 86 हजार करोड़ रुपये के बिल लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इस वित्तीय संकट के चलते कई छोटे और मध्यम ठेकेदार दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके हैं और बैंक लोन व मजदूरों के भुगतान के दबाव से जूझ रहे हैं।
Mumbai BMC Contractor Suicide – महाराष्ट्र राज्य कंत्राटदार महासंघ आक्रामक, प्रशासन से मांगा जवाब
देवकाते की मौत के बाद महाराष्ट्र राज्य कंत्राटदार महासंघ ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने मामले की उच्चस्तरीय जांच करने, पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा व बकाया राशि जारी करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज करने की मांग की है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर दुर्घटनावश मौत (ADR) का मामला दर्ज किया है और ठेकेदार के सुसाइड नोट व वित्तीय लेन-देन के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
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