
बॉम्बे लीक्स ,महाराष्ट्र
शिवसेना में टूट के बाद भी महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एक-एक कर पार्टी के कई नेता उद्धव का साथ छोड़ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का दामन थाम चुके हैं। उद्धव गुट को छोड़ने वाले नेताओं की लिस्ट में एक और नाम शामिल हो गया है।अब विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हो गई हैं।सीएम शिंदे ने भगवा शॉल उड़ाकर नीलम का पार्टी में स्वागत किया।इस दौरान उनके समर्थकों ने नीलम गोरे के समर्थन में ‘नीलम ताई तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं..’ के नारे लगाए।
गौरतलब है कि विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे शिंदे गुट में शामिल हो गई हैं।नीलम ने सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में शिंदे गुट की पार्टी ज्वाइन कर ली।नीलम गोरे उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना की पूर्व नेता हैं।वह साल 2002 से लगातार विधान परिषद के लिए चुनी जा रही हैं।विधान परिषद के उपाध्यक्ष नीलम, उद्धव ठाकरे की एक मजबूत नेता मानी जाती हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। लेकिन अब उनकी तरफ से ही उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका दिया गया है।नीलम गोरे कोई छोटी नेता नहीं हैं, उन्होंने शिवसेना के लिए कई सालों तक काम किया है। चुनाव में स्टार प्रचारक से लेकर पार्टी में ही कई पद संभालने तक, नीलम की राजनीति हमेशा सुर्खियों में रही है। पार्टी की एक भरोसेमंद प्रवक्ता के तौर पर भी उनकी पहचान बन चुकी है। मुद्दा कोई भी हो, पार्टी ने हर बार उन पर भरोसा जताया है।नीलम गोरे साल 2002, 2008, 2014 और 2020 में चार बार विधान परिषद के लिए चुनी गईं। 7 जुलाई 2022 से महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति हैं।यही नही राजनीति के साथ-साथ नीलीम गोरे पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सहायक भी थीं, यानी कि पूर्व सीएम की राजनीति में उनका पूरा दखल था। लेकिन अब देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में नीलम ने शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। उन्हें शिंदे सरकार में कोई मंत्री पद या कुछ और दिया जाता है या नहीं, अभी स्पष्ट नहीं।दरअसल कुछ दिन पहले ही पूर्व विधायक शिशिर शिंदे ने भी एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया था।वह उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवेसना (यूबीटी) से अलग होने के बाद राज ठाकरे के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) में शामिल हो गए थे।उन्होंने पिछले महीने शिवसेना (यूबीटी) से इस्तीफा दे दिया था।उन्होंने उद्धव ठाकरे को सौंपे अपने इस्तीफे में कहा था कि पार्टी का उपनेता बने हुए उन्हें एक साल हो गया है, लेकिन अब तक कोई भी बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है।इसके साथ ही उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि बीते छह महीने से उद्धव ठाकरे उनसे मिल ही नहीं रहे थे। उनका कहना है कि शिवसेना में उनके चार साल बर्बाद हो गए। बता दें कि शिशिर शिंदे 2019 में भांडूप वेस्ट निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे।
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