भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के दो प्रमुख शिपयार्डों के साथ 8 अगली पीढ़ी के युद्धपोतों (कॉर्वेट) के निर्माण हेतु कुल 53,867 करोड़ रुपये के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
Defence Ministry – जीआरएसई और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड को मिला निर्माण का जिम्मा
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) पांच युद्धपोतों का निर्माण और आपूर्ति करेगा, जबकि शेष तीन युद्धपोतों का जिम्मा गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) संभालेगा। इन अनुबंधों पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
Defence Ministry – अत्याधुनिक मिसाइलों और सेंसर सुइट्स से लैस होंगे ये युद्धपोत
ये नए नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट (NGCs) आधुनिक क्षमताओं से पूरी तरह लैस होंगे। इनमें अत्याधुनिक मिसाइलें, घातक हथियार और उन्नत सेंसर सुइट शामिल किए गए हैं, जो इन्हें हवा, जल की सतह और पानी के भीतर यानी तीनों डोमेन में प्रभावी ढंग से सैन्य अभियानों को अंजाम देने में सक्षम बनाएंगे।
Defence Ministry – बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहन
सरकार का अनुमान है कि इन युद्धपोतों के निर्माण से अगले दस वर्षों में शिपयार्डों के साथ-साथ सहायक उद्योगों और एमएसएमई (MSMEs) में भारी मात्रा में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
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