दिवाली के त्योहार से पहले महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मिलावटी खाद्य पदार्थों और एक्सपायर्ड सामान की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खाद्य उत्पाद बनाने और बेचने वाली कंपनियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि कोई भी एक्सपायर्ड या खराब खाद्य पदार्थ दोबारा बाजार में नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्यभर में खाद्य तेल की 1,089 जांच के दौरान 80 खाद्य व्यवसायों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और 28,753 क्विंटल तेल जब्त किया गया है। इसके अलावा खराब और एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ दस बड़ी कार्रवाइयों में लगभग पांच करोड़ रुपये का सामान जब्त हुआ है। FDA ने ऐसे खाद्य उत्पादों के सुरक्षित निपटान के लिए नया अनुपालन आदेश भी जारी किया है।
मिलावटी तेल पर FDA की बड़ी कार्रवाई, 28,753 क्विंटल तेल जब्त और 80 लाइसेंस निलंबित
महाराष्ट्र में दिवाली के दौरान मिठाइयों, नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने को देखते हुए FDA ने खाद्य तेल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है।
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले तेल का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिलावटी और असुरक्षित खाद्य तेल के खिलाफ विभाग की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
FDA के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 29 अक्टूबर 2026 के बीच महाराष्ट्र के सात विभागों में खाद्य तेल से संबंधित 1,089 निरीक्षण किए गए। इस दौरान प्रयोगशाला जांच के लिए 1,660 नमूने भी एकत्र किए गए।
इन कार्रवाइयों में कुल 28,753 क्विंटल खाद्य तेल जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 18.95 करोड़ रुपये है। नियमों के उल्लंघन के कारण 80 खाद्य व्यवसायों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
जांच में कुछ नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों से कम पाए गए, जबकि कुछ में असुरक्षित या गलत लेबलिंग से संबंधित समस्याएं सामने आईं।
मुंढे ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल दुकानदार या विक्रेता की जिम्मेदारी नहीं है। खाद्य पदार्थ बनाने वाली कंपनियों, वितरकों, गोदाम संचालकों और संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने सभी छोटे और बड़े खाद्य व्यवसायों से अपील की कि वे नियमों का पालन करें और ग्राहकों तक सुरक्षित उत्पाद ही पहुंचाएं।
एक्सपायर्ड खाने की तारीख बदलकर दोबारा बिक्री का खुलासा, अब सामान नष्ट करने का प्रमाण जरूरी
महाराष्ट्र FDA की जांच के दौरान एक्सपायर्ड और खराब हो चुके खाद्य पदार्थों को दोबारा बिक्री के लिए बाजार में पहुंचाने से संबंधित गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि कुछ स्थानों पर एक्सपायर्ड, क्षतिग्रस्त या ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय एजेंटों के माध्यम से दोबारा बिक्री की व्यवस्था में शामिल किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
कुछ मामलों में उत्पादों की एक्सपायरी तारीख में बदलाव करने और सामान नष्ट किए बिना ही उसके निपटान का प्रमाणपत्र तैयार करने जैसी अनियमितताएं भी जांच के दायरे में आई हैं।
इन समस्याओं को रोकने के लिए FDA ने ‘महाराष्ट्र एक्सपायर्ड, डैमेज्ड एंड रिजेक्टेड फूड हैंडलिंग एंड डिस्पोजल कम्प्लायंस ऑर्डर, 2026’ जारी किया है।
नए आदेश के तहत खाद्य कंपनियों और गोदाम संचालकों को एक्सपायर्ड या खराब उत्पादों को सामान्य बिक्री योग्य सामान से अलग रखना होगा।
इसके साथ ही संबंधित कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि खराब सामान का वास्तव में सुरक्षित निपटान किया गया है। इसके लिए उचित रिकॉर्ड और प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल से संबंधित अधिकृत निपटान एजेंसियों के माध्यम से खाद्य उत्पादों को नष्ट किए जाने का प्रमाण भी उपलब्ध कराना होगा।
FDA ने साफ किया है कि केवल कागज पर निपटान दिखाना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को यह साबित करना होगा कि एक्सपायर्ड सामान वास्तव में नष्ट किया गया है और उसे दोबारा बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया।
मुंढे के अनुसार, विभाग ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लिए अब तक 22 अनुपालन आदेश जारी किए हैं। इनमें होटल, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, स्कूलों में दिए जाने वाले खाद्य पदार्थ और अन्य खाद्य व्यवसाय शामिल हैं।
इन आदेशों का उद्देश्य खाद्य व्यवसाय संचालकों और लाइसेंस धारकों की जिम्मेदारी स्पष्ट करना तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
भिवंडी, वडपे और अंबरनाथ में छापेमारी, करीब ₹5 करोड़ का खराब खाद्य स्टॉक जब्त
एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों की कथित अवैध बिक्री की जांच के तहत महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ सप्ताहों में कई गोदामों और खाद्य भंडारण केंद्रों पर कार्रवाई की है।
मुंढे के अनुसार, भिवंडी में सबसे पहले लगभग 80 हजार रुपये के खाद्य पदार्थ जब्त किए गए। इसके बाद एक अन्य कार्रवाई में करीब 26 लाख रुपये का स्टॉक पकड़ा गया।
वडपे इलाके में भी दो अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई। यहां नियमों के उल्लंघन से संबंधित सामग्री जब्त करने के साथ एक खाद्य व्यवसाय का लाइसेंस निलंबित किया गया।
अंबरनाथ, पडघा और अन्य स्थानों पर भी एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों के भंडारण और निपटान से संबंधित कार्रवाई की गई है।
FDA आयुक्त के अनुसार, ऐसी दस बड़ी कार्रवाइयों में लगभग पांच करोड़ रुपये का खाद्य स्टॉक जब्त किया गया। इन मामलों में दो आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में 32 आरोपियों का उल्लेख किया गया था, जबकि बाद की विस्तृत रिपोर्टों में कुल 34 आरोपियों के नाम सामने आए हैं। इनमें खाद्य कारोबार से जुड़े संचालक, प्रबंधक, एजेंट और अन्य संबंधित व्यक्तियों की कथित भूमिका की जांच की जा रही है।
मुंढे ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य केवल अधिक से अधिक छापेमारी करना या लाइसेंस निलंबित करना नहीं है। सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है जिसमें खाद्य उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया से लेकर भंडारण, बिक्री और निपटान तक सभी चरणों में जवाबदेही तय हो।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में पिछले करीब दो महीनों से लगातार काम किया जा रहा है और दिवाली के बाद भी अभियान जारी रहेगा।
FDA ने खाद्य व्यवसायों को चेतावनी दी है कि यदि एक्सपायर्ड सामान दोबारा बिक्री के लिए बाजार में पहुंचाया गया या नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दिवाली पर खाद्य पदार्थ खरीदने वाले नागरिकों के लिए भी उत्पादों की एक्सपायरी तारीख, पैकेजिंग और गुणवत्ता की जांच करना महत्वपूर्ण है। संदिग्ध खाद्य पदार्थों की शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से की जा सकती है।
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